मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में शुक्रवार को पूजा, आराधना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पांच दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ हुआ। बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पूरे परिसर को केसरिया पताकाओं, पुष्प सज्जा और धार्मिक प्रतीकों से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे भोजशाला का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

सुबह से ही भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। पूजा-अर्चना, हवन और आरती के साथ बसंत उत्सव की शुरुआत की गई। भक्तों ने मां सरस्वती की आराधना करते हुए शिक्षा, ज्ञान और संस्कृति की समृद्धि की कामना की। पूरे क्षेत्र में “जय श्रीराम” और वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई देती रही।
आयोजकों के अनुसार, यह बसंत उत्सव लगातार पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
भोजशाला परिसर में इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। पेयजल, चिकित्सा सहायता और यातायात नियंत्रण के इंतजाम भी किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति के बीच समन्वय के साथ कार्यक्रम को संपन्न कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि भोजशाला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। बसंत पंचमी के अवसर पर यहां होने वाले आयोजन को लेकर हर वर्ष श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
बसंत उत्सव के शुभारंभ के साथ ही भोजशाला परिसर आस्था, संस्कृति और परंपरा के रंग में रंग गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।