मुंबई नगर निगम चुनावों के बाद मेयर पद को लेकर सियासत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। इसी कड़ी में दिल्ली में अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात और बीएमसी में शक्ति संतुलन पर गहन मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष नेतृत्व स्तर पर मेयर पद के लिए तोल-मोल और रणनीति तय करने की कवायद तेज हो गई है। अगले 24 घंटे मेयर रेस के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीएमसी में स्पष्ट बहुमत न होने की स्थिति में लॉटरी सिस्टम के जरिए मेयर चुने जाने का विकल्प भी खुला हुआ है। इसी को लेकर कल बड़ा फैसला लिया जा सकता है। अगर लॉटरी सिस्टम लागू होता है, तो कई दावेदारों की किस्मत का फैसला चिट के जरिए हो सकता है, जिससे सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। यही वजह है कि सभी दल अपने-अपने स्तर पर जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय दिल्ली की बैठकों पर खास नजर रखी जा रही है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की राय और सहमति के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। कुछ दल जहां गठबंधन के जरिए मेयर बनाने की कोशिश में हैं, वहीं कुछ खेमा लॉटरी सिस्टम को अपने लिए फायदेमंद मान रहा है। इसी वजह से पर्दे के पीछे लगातार बातचीत और रणनीतिक बैठकें चल रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर अगले 24 घंटे में सहमति नहीं बनती है, तो मामला और उलझ सकता है। मेयर पद केवल एक प्रशासनिक कुर्सी नहीं, बल्कि मुंबई की राजनीति में शक्ति, प्रतिष्ठा और भविष्य की दिशा तय करने वाला पद माना जाता है। ऐसे में हर दल कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता।
अब सभी की नजरें कल होने वाले फैसले पर टिकी हैं। क्या मेयर का चयन सहमति से होगा या फिर लॉटरी सिस्टम से? इसका जवाब जल्द सामने आएगा, लेकिन इतना तय है कि मुंबई की राजनीति में अगले कुछ घंटे बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।