उत्तर प्रदेश में 50 साल पुराने एक विचित्र मामले का निपटारा हुआ है। मामला 7 रुपए 65 पैसे की चोरी से जुड़ा था, जिसके आरोप में दो व्यक्तियों पर केस दर्ज किया गया था। उस समय घटना के सबूतों के अभाव में पुलिस और न्यायपालिका को आरोपी पर दोष सिद्ध करने में कठिनाई हुई। लंबे इंतजार और कई दौर की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया और केस को बंद कर दिया।

यह घटना स्थानीय लोगों के लिए हमेशा चर्चा का विषय रही। लोग हैरानी जताते रहे कि इतनी छोटी राशि के लिए इतने वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही। अदालत के अनुसार, सबूतों की कमी और गवाहों के बयान में विरोधाभास के कारण दोष सिद्ध करना असंभव था। अब दोनों आरोपी कानून की नजर में निर्दोष हैं। मामले की सुनवाई में जज ने यह भी कहा कि न्याय व्यवस्था में समय कभी-कभी लंबा हो सकता है, लेकिन अंततः सही फैसला आता है।
50 साल बाद केस बंद होने से पीड़ित पक्ष और समाज दोनों ने राहत की सांस ली है। हालांकि यह मामला लोगों के लिए कानूनी प्रक्रियाओं की लंबाई और न्याय मिलने में लगने वाले समय की याद दिलाता है।