मैं यहीं हूं पापा, मुझे बाहर निकलवा दो… ग्रेटर नोएडा के युवराज के हादसे के दिन क्या हुआ था, पिता ने बताई पूरी कहानी

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Shikha Bhardwaj

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ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क इलाके में एक दिल दहला देने वाले हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई। 18 जनवरी की रात सेक्टर-150 के टी-प्वाइंट के पास एक निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में उनकी कार गिर गई। डूबने से पहले युवराज ने अपने पिता को फोन कर कहा— “पापा… मेरी कार नाले में गिर गई है, मैं पानी में फंसा हूं, मुझे बचा लो।” ये उसके आखिरी शब्द साबित हुए। पिता बदहवास हालत में मौके पर पहुंचे, लेकिन उनकी आंखों के सामने ही बेटा जिंदगी की जंग हार गया। इस घटना के बाद दो बिल्डर कंपनियों पर लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

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आरोप है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी लापरवाही बरती गई। दमकल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तो पहुंचीं, लेकिन उनके पास जरूरी संसाधन नहीं थे। पिता के मुताबिक फेंकी गई रस्सी युवराज तक नहीं पहुंची, क्रेन छोटी पड़ गई और ठंडे पानी व लोहे के सरियों का हवाला देकर बचाव दल भी अंदर उतरने से हिचकता रहा। जिस प्लॉट में हादसा हुआ वहां करीब 50 फुट गहरा गड्ढा था, जिसमें हमेशा पानी भरा रहता था, लेकिन न बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी यहां वाहन फंस चुके थे, फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया।

घटना के बाद टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के निवासियों ने कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया और बिल्डरों व प्राधिकरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। ज्वाइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने मामले को दुखद बताते हुए कहा कि परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर जांच की जा रही है। हादसे के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में बैरिकेडिंग और जर्सी बैरियर लगवाए हैं, लेकिन सवाल वही है—अगर पहले सुरक्षा इंतजाम होते तो क्या युवराज आज जिंदा नहीं होता?

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Author: Shikha Bhardwaj

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