अजमेर दरगाह पर उर्स के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चादर पर रोक लगाने संबंधी याचिका को सु्प्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है।
चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन और अजमेर दरगाह के गद्दीनशीन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश की एकता, अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि नए साल की शुरुआत उम्मीद, मोहब्बत, एकता और अमन के पैगाम के साथ हुई है और यह संदेश भारत से पूरी दुनिया तक जाना चाहिए।
हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दरगाह में चादर भेजने पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर यह स्पष्ट कर दिया है कि नफरत, अराजकता और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाली सोच के लिए देश में कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अदालतों का सहारा लेकर फ्रिवोलस और फर्जी याचिकाएं दायर करते हैं, जिनका उद्देश्य देश की कम्युनल हार्मनी और यूनिटी इन डाइवर्सिटी को चोट पहुंचाना होता है, लेकिन सर्वोच्च अदालत का यह फैसला ऐसे प्रयासों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।
गद्दीनशीन सैयद हाजी सलमान चिश्ती ने कहा कि अजमेर शरीफ दरगाह एक आध्यात्मिक स्थल है, जहां हर मजहब, हर विचार और हर देश के लोग मोहब्बत और भाईचारे के साथ आते हैं। वर्ष 1947 से लेकर आज तक देश के सभी प्रधानमंत्रियों की ओर से यहां शांति का संदेश दिया जाता रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लगातार दरगाह में चादर भेजी जा रही है और शांति संदेश पढ़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 814वें सालाना उर्स के दौरान करीब 10 लाख जायरीन अजमेर शरीफ पहुंचे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल, अल्पसंख्यक मंत्रालय और देश के हर नागरिक की ओर से दरगाह में चादर पेश की और शांति संदेश पढ़ा गया। इस दौरान देश की एकता, अखंडता, अमन और तरक्की के लिए दुआ की गई।
हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह फैसला न सिर्फ संविधान की भावना को मजबूत करता है, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, भाईचारे और आपसी सौहार्द की परंपरा को भी और सशक्त करता है।