हरियाणा: कांग्रेस में बदलाव के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए इन पर खेल सकती है दांव, ये अब भी मजबूत दावेदार|

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में संघर्ष को खत्म करने के लिए 20 बिंदुओं का एक प्रस्ताव दिया है जिसमें हमास को हथियार छोड़ने के लिए भी कहा गया है। क्या ट्रंप के लिए हमास को राजी करना इतना आसान होगा। आइये समझते है…

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापित करने के लिए 20 बिंदुओं का एक प्रस्ताव जारी किया। अगले दिन उन्होंने हमास को चेतावनी देते हुए कहा कि आपके पास तीन-चार दिन का वक्त है वरना परिणाम दुखद होंगे। गाजा में युद्ध समाप्त करने की ट्रंप की इस योजना का प्रधानमंत्री मोदी समेत दुनियाभर के कई देशों ने स्वागत किया है। दूसरी ओर हमास इस पर प्रतिक्रिया देने से पहले पूरे मामले पर विचार कर रहा है। ट्रंप के प्रस्ताव पर अमल होता है तो इस्राइल और हमास के बीच युद्ध विराम के 72 घंटे में सभी जीवित और मृत बंधकों को छोड़ना होगा।

ट्रंप ने 20 सूत्री योजना के बारे में क्या कहा?

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के सत्र के दौरान 20 सूत्री शांति प्रस्ताव कुछ अरब देशों के साथ साझा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि वे गाजा में युद्ध समाप्त करने की योजना पर सहमत हो गए हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि हमास इन शर्तों को स्वीकार करेगा या नहीं।

ट्रंप ने इस्राइल-हमास युद्ध को समाप्त करने और युद्धग्रस्त फिलिस्तीनी क्षेत्र में युद्ध के बाद शासन स्थापित करने के लिए 20-सूत्री योजना पेश की। ट्रंप की योजना के तहत एक अस्थायी शासन बोर्ड की स्थापना की जाएगी, जिसके अध्यक्ष ट्रंप होंगे और जिसमें पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी शामिल होंगे। इस योजना में लोगों को गाजा छोड़ने की आवश्यकता नहीं है और अगर दोनों पक्ष इसे स्वीकार करते हैं तो युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा। इसमें यह भी कहा गया है कि युद्ध खत्म होने के 72 घंटे के भीतर सभी बंधकों को रिहा कर दिया जाएगा। ट्रंप से कहा कि अगर हमास इस इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता है तो हमास को हराने के लिए अमेरिका पूरी तरह से इस्राइल का समर्थन करेगा।

 

क्या है  ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 20 सूत्रीय शांति समझौता

1. गाजा को आतंक मुक्त क्षेत्र बनाया जाएगा, ताकि वह पड़ोसी देशों के लिए कोई खतरा न बने।

2. गाजा का पुनर्निर्माण और विकास कार्य शुरू होगा, जिससे वहां के लोगों का जीवन बेहतर हो।

3. जैसे ही दोनों पक्ष इस योजना को स्वीकार करेंगे, इस्राइल तुरंत सैन्य अभियान रोक देगा और चरणबद्ध तरीके से गाजा से सेना हटाएगा।

4. इस्राइल के सार्वजनिक रूप से योजना स्वीकार करने के 72 घंटे के भीतर सभी बंधकों को रिहा किया जाएगा।

5. बंधकों की रिहाई के बाद इस्राइल अपने यहां आजीवन कारावास की सजा पाए 250 फलस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। इसके अलावा 7 अक्तूबर 2023 में हमास के हमले के बाद हिरासत में लिए गए 1700 गाजावासियों की भी रिहाई होगी। इसके अलावा हर एक इस्राइली बंधक के शव के बदले इस्राइल को गाजा के 15 कैदियों के शव लौटाने होंगे।

6. जो हमास सदस्य शांतिपूर्वक साथ रहने की शपथ लेंगे, उन्हें माफी दी जाएगी। जो बाहर जाना चाहेंगे, उन्हें सुरक्षित रास्ता और किसी इच्छुक देश में बसने की सुविधा मिलेगी।

7. समझौते के बाद मानवीय सहायता गाजा में बड़े पैमाने पर भेजी जाएगी। रोजाना कम से कम 600 ट्रक राहत सामग्री पहुंचेगी।

8. सहायता सामग्री का वितरण संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रिसेंट जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की तरफ से किया जाएगा।

9. गाजा का प्रशासन फलस्तीनी तकनीकी विशेषज्ञों के हाथों में होगा, जिसे एक अंतरराष्ट्रीय समिति की निगरानी में चलाया जाएगा। इसका नेतृत्व डोनाल्ड ट्रंप खुद करेंगे। ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर इसमें उनका साथ देंगे।

10. गाजा के लिए एक आर्थिक पुनर्निर्माण योजना बनाई जाएगी, जिससे निवेश और रोजगार के अवसर पैदा हों। इसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं आगे बढ़ाएंगी।

11. गाजा में विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित होगा, जहां करों में छूट और व्यापारिक सुविधाएं दी जाएंगी।

12. किसी भी निवासी को गाजा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। जो बाहर जाएंगे, उन्हें वापस लौटने का अधिकार होगा।

13. गाजा की शासन व्यवस्था में हमास को कोई भूमिका नहीं मिलेगी और सभी आतंकी सुरंगें व सैन्य ढांचे नष्ट किए जाएंगे। क्षेत्रीय देश यह सुनिश्चित करेंगे कि हमास और अन्य समूह समझौते का पालन करें।

14. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की मदद से अस्थायी सुरक्षा बल गाजा में तैनात होंगे। ये सुरक्षा और स्थानीय पुलिस को प्रशिक्षण देंगे।

15. इस्राइल न तो गाजा का विलय करेगा और न ही स्थायी कब्जा।

16. अगर हमास प्रस्ताव को मानने में देरी करता है, तो पहले आतंक-मुक्त क्षेत्रों में यह योजना लागू होगी।

17. इस्राइल कतर पर हमला नहीं करेगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाजा संकट में कतर की मध्यस्थता की भूमिका को मान्यता देगा।

18. गाजा के लोगों को चरमपंथ से दूर करने के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

19. जब गाजा का पुनर्निर्माण और फलस्तीनी प्राधिकरण का सुधार कार्यक्रम पूरा हो जाएगा, तब भविष्य में फलस्तीनी राज्य का रास्ता खुल सकता है।

20. अमेरिका, इस्राइल और फलस्तीन के बीच लंबे समय तक के राजनीतिक समाधान पर बातचीत को आगे बढ़ाएगा।

क्या है गाजा जिसे लेकर सारा विवाद है?

यह करीब 365 वर्ग किलोमीटर का एक छोटा सा क्षेत्र है। इसके एक ओर भूमध्य सागर। बाकी तीन ओर से इसकी सीमाएं इस्राइल और मिस्र से लगी हुई हैं। इसकी उत्तर पूर्वी और दक्षिणी पूर्वी सीमा की तरफ इस्राइली क्षेत्र है। वहीं,  दक्षिण पश्चिम में गाजा पट्टी की सीमा मिस्र से लगती है। इसके पश्चिम में भूमध्य सागर है।

इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष का केंद्र गाजा पट्टी ही रहा है। यह दो फलस्तीनी क्षेत्रों में से एक है। गाजा पट्टी के अलावा वेस्ट बैंक दूसरा फलस्तीनी क्षेत्र है, जिसके अधिकांश हिस्से पर इस्राइल का कब्जा है।

हमास क्या है जिसे चेतावनी दे रहे हैं ट्रंप?

लगभग दो दशक से गाजा पट्टी पर हमास का नियंत्रण है। यह इस्राइल के अस्तित्व का विरोध करता है, जिसका दावा है कि वह फलस्तीन पर कब्जा कर रहा है। अक्टूबर 2023 में, हमास ने दक्षिणी इस्राइल पर हमला किया था। इसी हमले के बाद से इस्राइल और हमास के बीच युद्ध जारी है।

हमास, जिसे हरकत अल-मुकावमा अल-इस्लामिया के रूप में जाना जाता है। इसकी  स्थापना शेख अहमद यासीन ने की थी, जो एक फिलिस्तीनी धर्मगुरु थे और जो बाद में मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थानीय शाखाओं में एक कार्यकर्ता बन गए। 1960 के दशक के उत्तरार्ध से, यासीन ने वेस्ट बैंक और गाजा में धर्मोपदेश और धर्म से जुड़े कार्य किए, जिस पर 1967 में छह दिन की लड़ाई के बाद इस्राइल ने कब्जा कर लिया था।

यासीन ने दिसंबर 1987 में गाजा में ब्रदरहुड की राजनीतिक शाखा के रूप में हमास की स्थापना की, जो पश्चिमी तट, गाजा और पूर्वी यरुशलम पर इस्राइल के कब्जे के खिलाफ एक फिलिस्तीनी विद्रोह के रूप में जाना गया। उस समय, हमास का उद्देश्य ब्रदरहुड के लिए फलस्तीनियों का समर्थन पाना और इस्राइलियों के खिलाफ हिंसा करना था। 1997 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने हमास को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया। साल 1993 से लेकर साल 2005 तक हमास ने इस्राइल में कई आत्मघाती हमले किए। 2007 में फलस्तीनी चुनाव जीतने बाद हमास गाजा पट्टी में एकमात्र शासक बन गया।

इस्राइल और हमास के बीच युद्ध का कारण?

हमास और इस्राइल के बीच कई बार संघर्ष हो चुका है। अक्सर गाजा इलाके से इस्राइल पर रॉकेट और हवाई हमले होते रहे हैं। हमास इस्राइल राज्य को मान्यता देने से इनकार करता है। उसने 1990 के दशक के मध्य में इस्राइल और पीएलओ के बीच बातचीत के बाद हुए ओस्लो शांति समझौतों का भी हिंसक विरोध किया था। हमास की एक सशस्त्र शाखा है जिसे इज़ अल-दीन अल-कसम ब्रिगेड कहा जाता है। यह इस्राइल में बंदूकधारियों और आत्मघाती हमलावरों को भेजता है। हमास अपनी सशस्त्र गतिविधियों को प्रतिशोध बताता है।

क्या इससे पहले भी कोई हमास और गाजा के बीच शांति प्रस्ताव आया है?

7 अक्तूबर 2023 में हमास ने इस्राइल पर हमला किया जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद मार्च 2024 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद गाजा पट्टी में तत्काल युद्ध विराम लागू किए जाने वाला एक प्रस्ताव पारित किया गया। मोजाम्बिक के राजदूत पेरो अफोंसो ने 10 निर्वाचित अस्थाई सदस्य देशों की ओर यह प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें मुख्य रूप से तीन मांगें की गई थीं। प्रमुख मांग में गाजा में युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और गाजा में मानवीय सहायता का प्रावधान शामिल था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 14 वोट डाले गए, जबकि अमेरिका ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। प्रस्ताव में हमास की निंदा नहीं करने की वजह से अमेरिका ने इससे दूरी बनाई थी।

ट्रंप की योजना लागू करना कितना मुश्किल? 

अमेरिका के लिए गाजा में इस योजना को लागू करने में क्या कठिनाइयां आ सकती हैं। यही सवाल हमने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के प्रोफेसर डॉ. संजय पांडे से किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप को भी पता है कि इसमें बहुत सी मुश्किले हैं, इसलिए उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कोई भी सवाल नहीं लिया। इसमें कई ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब इस 20 सूत्रीय प्रस्ताव में नहीं दिया गया है। इसमें  फलस्तीन को एक राष्ट्र बनाने की केवल संभावना की बात की गई है। लेकिन नेतन्याहू अभी भी फलस्तीन को एक अलग राष्ट्र नहीं मानते हैं। नेतन्याहू द्वि-राष्ट्र समाधान पर क्या अपनी पॉलिसी को बदलेंगे इस पर कुछ भी साफ नहीं है। इसमें हमास के लिए क्या स्थान होगा वो भी साफ नहीं है। हमास को हथियार छोड़ने और शासन चलाने की बात को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसमें यह भी सवाल है कि हमास हथियार छोड़ने के लिए क्यों राजी होगा।

साथ ही क्या गाजा के पुननिर्माण में अमेरिका की कोई भूमिका होगी इस पर कुछ साफ नहीं है। लेकिन एक बात अच्छी है कि गाजावासियों को गाजा छोड़ने के लिए नहीं कहा गया है। उसके बाद फिर यह सवाल मुखर हो जाता है कि गाजा पर किसका शासन होगा यह बात साफ नहीं है। इसमें इस्राइल की द्वि-राष्ट्र समाधान को लेकर भूमिका तय नहीं है, न ही हमास की भूमिका का कोई पता है। लेकिन हमास के ऊपर दबाव जरूर पड़ेगा। क्योंकि ट्रंप ने कहा है कि अगर हमास इस समझौते को नहीं मानता है तो अमेरिक पूरी तरह इस्राइल का साथ देगा।

 

जब इतने सवाल अनुतरित हैं तो क्या समझौता हो पाएगा?
प्रोफेसर संजय पांडेय कहते है कि अमेरिका का यह समझौता हमास से होने की संभावना बहुत कम लग रही है, इस समझौते में फलस्तीन के और गुट या अन्य अरब देश की भूमिका होने की संभावना है, लेकिन वो भी तय नहीं है। इसमें कई ऐसे सवाल है जिसका उत्तर नहीं दिया गया है, लेकिन इससे ट्रंप अपनी छवि को संवेदनशील दिखा सकते हैं। इससे ट्रंप अपनी छवि चमकाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही अगर हमास इसे नहीं मानता है तो नेतन्याहू  को एक मौका मिल जाएगा यह कहने कि हमने शांति और यह भी संभावना रखी थी कि फलस्तीन भविष्य में एक देश बन सकता है लेकिन उसके बावजूद हमारी बात नहीं सुनी गई। इस सफाई के साथ इस्राइल अपने मन की चीजें कर सकता है। संभावना यह भी है कि इससे अमेरिका को खुले तौर पर इस्राइल का बिना किसी रोकटोक के साथ देने का मौका मिल सकता है।

हमास ने इस प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
हमास ने प्रस्ताव को लेकर कहा कि किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से पहले इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हमास के वार्ताकारों ने कहा, वे इसकी समीक्षा करेंगे और जवाब देंगे। हमास ने प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया नहीं दी है।

ट्रंप के प्रस्ताव पर भारत और दूसरे देशों ने क्या कहा है?
ट्रंप की योजना का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दुनिया के ज्यादातर देशों ने स्वागत किया है। पीएम मोदी ने कहा, यह योजना फलस्तीनी-इस्त्राइली लोगों के साथ व्यापक पश्चिम एशियाई क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक शांति, सुरक्षा और विकास की व्यावहारिक राह तैयार करती है। अमेरिका के धुर विरोधी चीन ने भी गाजा युद्ध खत्म कराने की ट्रंप की योजना का समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 20-सूत्रीय योजना को अहम बताते हुए कहा, चीन सभी पक्षों से संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों को ईमानदारी से लागू करने, गाजा में तत्काल व व्यापक युद्धविराम लागू करने, बंधकों को रिहा करने और मानवीय संकट को खत्म करने की अपील करता है। इसी तरह पश्चिम एशियाई आठ अरब और मुस्लिम बहुल देशों ने गाजा में युद्ध समाप्ति और शांति बहाली की योजना का स्वागत किया। उधर, फलस्तीन को देश के रूप में मान्यता देने वाले फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

क्या इस योजना में भारत की भी कोई भूमिका हो सकती है?
गाजा शांति योजना के तहत भारत को मध्य-पूर्व में विकास और पुनर्निर्माण कार्यों में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। इस्राइल के राजदूत रुवेन अजार ने कहा कि भारत विश्व का नया निर्माता है। हम चाहते हैं जैसे आप भारत का निर्माण कर रहे हैं, वैसे ही हमारे क्षेत्रों का भी निर्माण करें। अजार ने कहा, भारत ने इस क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए सकारात्मक भूमिका निभाई है और इसी वजह से नई दिल्ली को गाजा में आर्थिक व निर्माण गतिविधियों में शामिल होने का स्वागत किया जाएगा। अजार ने 20 सूत्री शांति योजना पर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया का भी स्वागत किया।
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Author: ILMA NEWSINDIA

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