सार
Rishi Kapoor Birth Anniversary: दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर की आज 04 सितंबर को बर्थ एनिवर्सरी है। फिल्म जगत के प्रतिष्ठित कपूर परिवार में जन्म लेने वाले ऋषि कपूर ने अभिनय की दुनिया में खूब नाम कमाया। जानते हैं उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से

4 दिसंबर 1952 को हिंदी सिनेमा के शोमैन राजकपूर और कृष्णा कपूर के घर जन्मे ऋषि कपूर ने अदाकारी के नए मानक स्थापित किए। सिर्फ अदाकारी ही नहीं, बल्कि और भी कई मामलों में वे हटकर थे। वे खाने-पीने के बेहद शौकीन थे और उतने ही शौकीन वे पहनने-ओढ़ने के मामले में भी थे। उनका फैशन सेंस कमाल का था। ऋषि कपूर ने बाल कलाकार के रूप में करियर की शुरुआत कर दी थी। हालांकि, एक्टर के तौर पर उन्होंने फिल्म ‘बॉबी’ से डेब्यू किया। फिल्म जबर्दस्त हिट रही। पहली ही फिल्म से उन्होंने शोहरत बटोरनी शुरू कर दी। ऋषि कपूर की बर्थ एनिवर्सरी पर पढ़िए उनसे जुड़े किस्से

बचपन में ही दिखा दिया अभिनय का कमाल
ऋषि कपूर का जन्म फिल्मी परिवार में हुआ। मानो अभिनय प्रतिभा उन्हें विरासत में मिली और बचपन में ही यह उनके व्यवहार में झलकने लगी थी। कहा जाता है कि अभी उन्होंने चलना शुरू ही किया था कि वे आइने के सामने जाकर तरह-तरह की शक्लें बनाया करते थे। कपूर खानदान की महफिलों में ये कहानी अक्सर सुनाई जाती है कि उन्हीं दिनों एक शाम राज कपूर ने अपने बेटे को अपनी व्हिस्की के गिलास से एक सिप शराब पिलाई और ऋषि ने शीशे के सामने जाकर एक शराबी का अभिनय करना शुरू कर दिया था। ऋषि के अभिनय की शुरुआत उनके बचपने से ही हो गई थी। उनके दादा के नाटक ‘पठान’ में खटिया पर जो बच्चा सोया हुआ दिखाई देता था वो और कोई नहीं ऋषि कपूर थे।

अभिनय के चक्कर में स्कूल से कट गया था नाम
ऋषि कपूर जब मुंबई के कैम्पियन स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे, तो उनके पिता राज कपूर ने अपनी आत्मकथात्मक फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में उन्हें अपने बचपन का रोल दिया। ऋषि शूटिंग के लिए स्कूल नहीं जाते थे। अध्यापकों को ये बात बहुत अखरती। नतीजा ये हुआ कि उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया और राज कपूर को अपने बेटे को दोबारा स्कूल में दाखिल कराने के लिए एड़ी चोटी को जोर लगाना पड़ा।

बाल कलाकार के रूप में जीता राष्ट्रीय पुरस्कार
फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के लिए ऋषि कपूर को सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। बाद में उन्होंने अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में लिखा था, “जब मैं मुंबई लौटा तो मेरे पिता ने उस पुरस्कार के साथ मुझे अपने दादा पृथ्वीराज कपूर के पास भेजा। मेरे दादा ने वो मेडल अपने हाथ में लिया और उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने मेरे माथे को चूमा और भरी हुई आवाज में कहा, ‘राज ने मेरा कर्जा उतार दिया।’

पैसे देकर पाया डेब्यू फिल्म के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड
ऋषि कपूर ने बतौर हीरो फिल्म ‘बॉबी’ से डेब्यू किया। ‘बॉबी’ (1973) के लिए उन्होंने बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता, लेकिन ‘खुल्लम खुल्ला’ में उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया कि यह अवॉर्ड उन्होंने 30 हजार रुपये देकर खरीदा था। एक पीआर ने उनसे कहा, ‘पैसे दो, अवॉर्ड दिलवाऊंगा।’ उत्साह में युवा ऋषि ने पैसे दे दिए, लेकिन बाद में उन्हें इस बात का अफसोस हुआ।

ऋषि कपूर अपनी शादी में बेहोश हो गए थे। दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ ऋषि ही नहीं, बल्कि नीतू कपूर भी बेहोश हो गई थीं। नीतू कपूर अपने भारी लहंगे को नहीं संभाल पाई थीं, इस चक्कर में बेहोश हो गईं। वहीं, वहीं भीड़ होने की वजह से ऋषि कपूर बेहोश हो गए थे। बता दें कि दोनों की शादी 22 जनवरी 1980 को हुई थी।
एक ऐसा वक्त था जब ऋषि कपूर बहुत ज्यादा स्मोकिंग किया करते थे। वे चेन स्मोकर थे। मगर, एक रोज उनकी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी ने कुछ ऐसा कह दिया कि वे उस बात के दिल से लगा बैठे। ऋषि कपूर ने इसका जिक्र अपनी आत्मकथा में किया। किताब के जरिए उन्होंने बताया, ‘मैं बहुत ज्यादा स्मोकिंग करता था, लेकिन मैंने तब सिगरेट छोड़ दी, जब मेरी बेटी ने कहा, ‘मुझसे आपको सुबह-सुबह किस नहीं होगा, क्योंकि आपके मुंह से बदबू आती है’। उस दिन के बाद से मैंने सिगरेट को हाथ नहीं लगाया’।

अभिनेता के तौर पर ऋषि कपूर ने खूब नाम कमाया। उन्होंने ‘अमर अकबर एंथोनी’, ‘कभी कभी’, ‘दूसरा आदमी’, ‘कर्ज’, ‘प्रेम रोग’, ‘सागर’, ‘नसीब’, ‘कातिलों के कातिल’, ‘कुली’, ‘दोस्ती दुश्मनी’, ‘घर घर की कहानी’, ‘घराना’ और ‘चांदनी’ जैसी फिल्मों में काम किया। इसके अलावा उन्होंने डायरेक्शन में भी अपना हाथ आजमाया था। साल 1999 में उन्होंने ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के साथ ‘आ अब लौट चलें’ फिल्म बनाई थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी।

ऋषि कपूर खानपान के बेहद शौकीन थे। उनके लिए नीतू सिंह हर दिन नई रेसिपी खोजकर व्यंजन बनाया करती थीं। साल 2017 में कपिल शर्मा के शो में ऋषि कपूर और नीतू सिंह दोनों आए थे। तब नीतू ने खुलासा किया था कि वे ऋषि कपूर को हर दिन नई डिश परोसती हैं और इसके लिए बाकायदा काफी मशक्कत करती हैं। वे नए-नए व्यंजन सर्च करती हैं। दरअसल, शो में कपिल शर्मा ने नीतू सिंह से ऋषि कपूर के खानपान के शौक के बारे में सवाल पूछा था। कपिल को जवाब देते हुए नीतू सिंह ने कहा था, ‘मुझे खाना बनाने का कोई शौक नहीं है, मगर मेरे पति को बहुत पसंद है। इसलिए मैं अब तक रोज ऑनलाइन नई डिश बनाना सीखती हूं और बनाती हूं। अगर मैं एक महीने बाद भी कोई डिश रिपीट करती हूं तो ऋषि गुस्सा होकर कहते हैं कि ये तो कल ही बनाई थी। इसलिए मैं हर रोज अलग बनाती हूं, ताकि ये खुश रहें’।

ऋषि कपूर ने फिल्मों में अपने स्टाइल से कई नए ट्रेंड शुरू किए थे। इनमें ओवरसाइज चश्मे से लेकर अलग-अलग रंगों के स्वेटर्स पहनने का चलन भी एक्टर ने शुरू किया। ऋषि कपूर को स्वेटर कलेक्शन का काफी शौक भी रहा था। एक बार एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चिंटू जी ने इस बात का जिक्र किया था। स्वेटर के प्रति ऋषि कपूर का प्यार उनकी आखिरी फिल्म ‘शर्मा जी नमकीन’ तक बरकरार रहा। उन्हें स्वेटर का क्रेज इस कदर था कि वे फिल्मों में कभी इसे दोहराते नहीं थे। फिल्म ‘चांदनी’ में भी उनका स्वेटर प्रेम देखने को मिला। इस फिल्म में वे स्वेटर पहनकर श्रीदेवी के साथ बर्फीली वादियों में रोमांस करते हुए नजर आए। इसके बाद से उन्हें ‘स्वेटरमैन’ के नाम से पुकारा जाने लगा था।

ऋषि कपूर ने अपने चाचा शशि कपूर की तरह कभी भी रविवार को काम नहीं किया। रविवार उनके लिए परिवार का दिन होता था, लेकिन शशि कपूर के ठीक विपरीत वो बहुत कड़क और अनुशासनप्रिय पिता थे और अपने बच्चों से बहुत कम बात करते थे। जब चिंटू छोटे थे तो उनकी भी अपने पिता के सामने आवाज नहीं निकलती थी। इस बारे में बात करते हुए नीतू ने बताया था, ‘चिंटू रविवार को आरके स्टूडियो में फिल्म देखते या दोस्तों के साथ गप्पे मारते थे। यह उनका फिक्स रूल था’। बता दें कि 30 अप्रैल 2020 को ऋषि कपूर इस दुनिया को अलविदा कह गए।
