उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में बारिश थमने के बाद भी बाढ़ से हालात बिगड़ गए हैं। शारदा और अन्य नदियों के उफान ने 30 से अधिक गांवों को पानी में डुबो दिया है। मुख्य मार्गों पर पानी आने से यातायात बुरी तरह प्रभावित है और लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

गांव और शहर में जलभराव
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सदर, बीसलपुर, कलीनगर, अमरिया और पूरनपुर तहसील के गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
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टनकपुर हाईवे, पीलीभीत-बीसलपुर और बीसलपुर-बरेली मार्ग पर करीब दो फुट पानी बह रहा है।
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बरखेड़ा क्षेत्र में कई कच्चे मकान गिर गए, वहीं गाजीपुर कुंडा गांव पूरी तरह पानी से घिरकर टापू बन गया।
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शहर में कलेक्ट्रेट, अफसर कॉलोनी और जल निगम समेत कई सरकारी दफ्तर जलमग्न हैं।
पुलिस लाइन में नाव जैसी स्थिति
बाढ़ के हालात का जायजा लेने बुधवार को पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ट्रैक्टर से पुलिस लाइन पहुंचे। एसपी ने बैरकों, टावर, मैस और पुलिस अस्पताल का निरीक्षण किया और अफसरों को जलभराव की समस्या दूर करने के निर्देश दिए।
किसानों और ग्रामीणों की मुश्किलें
देवहा और अमेड़ी नदियों में उफान से खेतों में पानी भर गया है, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है। बरखेड़ा कस्बे के निचले इलाकों में लोग छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। चिनोरा मुस्तकिल गांव में दो ग्रामीणों के कच्चे मकान ढह गए।
राहत कार्य में जुटा प्रशासन
बाढ़ प्रभावित गांवों में लंच पैकेट और खाद्यान्न किट बांटी जा रही हैं। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने चंदोई गांव में राहत सामग्री वितरित की, जबकि एडीएम और एसडीएम की टीमें प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं। प्रशासन ने बताया कि जिले की 62 स्थायी व अस्थायी गोशालाओं की निगरानी की जा रही है, जिनमें से दो में पानी घुस चुका है।
बैराज से छोड़ा गया पानी
वनबसा बैराज से मंगलवार रात दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद खतरा और बढ़ गया। हालांकि बुधवार सुबह जलस्तर घटने पर कुछ गांवों में पानी उतर गया, लेकिन अब भी कीचड़ और गंदगी से लोग परेशान हैं।
