भिवानी की शिक्षिका मनीषा की रहस्यमयी मौत की जांच अब सीबीआई के हाथों में है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की घोषणा के 13 दिन बाद बुधवार को सीबीआई की टीम भिवानी पहुंची और आधिकारिक तौर पर जांच की शुरुआत कर दी। टीम में करीब 5 से 6 अधिकारी शामिल हैं, जो फिलहाल भिवानी रेस्ट हाउस में ठहरे हुए हैं।
जांच की शुरुआत
सीबीआई अधिकारियों ने सबसे पहले भिवानी सीआईए प्रथम के इंचार्ज से केस से जुड़ी जानकारी जुटाई। हालांकि अब तक टीम ने मनीषा के परिजनों और जिला प्रशासन से मुलाकात नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि वे पुलिस से केस की पूरी फाइल लेकर घटनास्थल पर पहुंचेंगे, जहां सीन रीक्रिएट कर तथ्यों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
रविवार को सीबीआई ने मनीषा के पिता संजय से फोन पर बातचीत कर भिवानी आने का आश्वासन दिया था। सोमवार और मंगलवार को परिजन व ग्रामीण इंतजार करते रहे, लेकिन टीम बुधवार दोपहर ही पहुंची। परिजनों का कहना है कि अब उन्हें न्याय की उम्मीद और बढ़ गई है।

तीन पोस्टमार्टम और उलझती गुत्थी
-
11 अगस्त: मनीषा लापता हुई।
-
13 अगस्त: सिंघानी नहर के पास उसका शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।
-
पहला पोस्टमार्टम भिवानी नागरिक अस्पताल में हुआ, जिसमें गला रेतकर हत्या की पुष्टि हुई।
-
दूसरा पोस्टमार्टम 15 अगस्त को रोहतक पीजीआई में हुआ, जिसकी रिपोर्ट में विवादित रूप से मौत को आत्महत्या बताया गया।
-
विरोध और धरने के बाद परिजनों ने तीसरे पोस्टमार्टम की मांग की, जिसे दिल्ली एम्स में किया गया। अब सीबीआई की जांच इसी रिपोर्ट पर आगे बढ़ेगी।
धरना और राजनीतिक घटनाक्रम
रिपोर्ट से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने ढिगावामंडी और ढाणी लक्ष्मण में धरना शुरू किया। 19 अगस्त की रात मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच का ऐलान किया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ और 21 अगस्त को मनीषा का अंतिम संस्कार हुआ।
जांच में चुनौतियाँ
जिस स्थान से मनीषा का शव बरामद हुआ था, वहां अब बारिश के चलते जलभराव हो गया है। फॉरेंसिक टीम पहले ही वहां से सबूत जुटा चुकी है और दो बार सीन रीक्रिएट कर चुकी है। लेकिन पानी भरने के कारण नए सबूत मिलने की संभावना बेहद कम है।
