Crisil Report: वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत को 33.2 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला और सेवा निर्यात 97.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया। चालू खाता घाटा घटकर 2.4 अरब डॉलर रह गया, जबकि भारत में कुल निवेश (13.2 अरब डॉलर) घाटे से अधिक रहा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई।

मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में विदेश से भारत को भेजा गया रेमिटेंस 33.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 28.6 अरब डॉलर था। क्रिसिल की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रेमिटेंस का मतलब किसी व्यक्ति द्वारा विदेश से अपने देश में या एक जगह से दूसरी जगह पैसे भेजना है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सेवा निर्यात भी बढ़कर 97.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की पहली तिमाही में 88.5 अरब डॉलर था। क्रिसिल ने कहा, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में सेवा निर्यात 97.4 अरब डॉलर रहा, जबकि रेमिटेंस 33.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
इसमें बताया गया है कि चालू खाता घाटा भी घटकर 2.4 अरब डॉलर रह गया, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल 0.2 फीसदी है। पिछले साल इसी तिमाही में यह घाटा 8.6 अरब डॉलर था, जो जीडीपी का 0.9 फीसदी था।
पहली तिमाही में भारत में वित्तीय प्रवाह सकारात्मक रहा और 13.2 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो चालू खाता घाटे से ज्यादा था। इसकी वजह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले साल से कम रहा, क्योंकि इस बार विदेशी कंपनियों और प्रवासी भारतीयों की ओर से कम निवेश हुआ।
विदेश कंपनियों ने इस बार भारत में ज्यादा निवेश किया और एफडीआई बढ़कर 27.2 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल 23.9 अरब डॉलर था।लेकिन भारत से बाहर 22.2 अरब डॉलर चला गया, जो पिछले साल 17.7 अरब डॉलर था। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) बढ़कर 1.6 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल 0.9 अरब डॉलर था। एफपीआई में इक्विटी निवेश 5.4 अरब डॉलर का हुआ, जबकि पिछले साल इसमें एक अरब डॉलर की निकासी हुई थी।
इस बार कर्ज (डेट सेगमेंट) से जुड़े निवेश में 2.9 अरब डॉलर की निकासी हुई, जबकि पिछले साल इसी समय 1.9 अरब डॉलर भारत में आया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी तिमाही में इक्विटी में निकासी और कर्ज वाले निवेश (डेट) में प्रवाह देखा जा सकता है।
