भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सी. कृष्णकुमार ने यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करते हुए उसे परिवारिक संपत्ति से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस और अदालत पहले ही ऐसे आरोपों को झूठा ठहरा चुके हैं। वहीं, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भूमि विवाद सुलझाने के लिए 1960 के भूमि आवंटन कानून में ऐतिहासिक संशोधन की घोषणा की।

वरिष्ठ भाजपा नेता और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सी. कृष्णकुमार ने अपने खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह आरोप झूठे हैं और परिवार में चल रहे संपत्ति विवाद के चलते लगाए गए हैं। कृष्णकुमार का बयान तब सामने आया जब मीडिया के कुछ हिस्सों ने बताया कि शिकायतकर्ता महिला ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर को पत्र भेजा था और उसे उनकी ओर से स्वीकार भी किया गया।
कृष्णकुमार ने स्पष्ट किया कि आरोप लगाने वाली महिला उनकी पत्नी की नजदीकी रिश्तेदार हैं। यह महिला पिछले कई वर्षों से उन पर ऐसे ही आरोप लगाती रही है। उन्होंने कहा कि इस महिला ने 2015 और 2020 के चुनावों के दौरान भी ऐसे आरोप लगाए थे जब वे और उनकी पत्नी चुनाव मैदान में थे। उनका कहना है कि पुलिस और अदालत दोनों ने ही महिला के आरोपों से जुड़े मामले की जांच की और सबूत न मिलने पर उन्हें खारिज कर दिया।
कांग्रेस विधायक के निलंबन के बाद मामला चर्चा में
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस के पालक्काड विधायक राहुल मामकूटाथिल को यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के कई मामलों में पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। इसी कारण भाजपा नेता पर लगे नए आरोपों ने और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है। कृष्णकुमार ने हालांकि साफ कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पहले भी गलत साबित हुए हैं और इस बार भी ऐसा ही होगा।
कृष्णकुमार ने आरोप लगाया कि इस महिला के पीछे पूर्व भाजपा नेता संदीप वॉरियर हैं, जिन्होंने हाल ही में पार्टी से नाराज होकर कांग्रेस जॉइन की है। उन्होंने कहा कि यह सब सोची-समझी रणनीति है ताकि उन्हें संपत्ति विवाद में कमजोर किया जा सके। उन्होंने साफ किया कि महिला ने घरेलू हिंसा और संपत्ति विवाद को लेकर पहले भी केस किया था, लेकिन पुलिस और अदालत ने जांच कर उसे झूठा पाया था।