भारत पर ट्रंप का अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू: विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को लग सकता है झटका; भारत की क्या रणनीति?

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वोंटोबेल में ईएम इक्विटीज के सह-प्रमुख राफेल लुएशर का कहना है कि उच्च टैरिफ भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। इससे अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव में आने वाली भारतीय कंपनियां भी निवेश संबंधी फैसले टाल सकती हैं, जिसका नकारात्मक असर नौकरियों पर पड़ सकता है।

Donald Trump 50pc forced tariffs imposed On India: Manufacturing ambitions may suffer setback; India ready

भारतीय उत्पादों पर बुधवार से 50 फीसदी उच्च अमेरिकी टैरिफ लागू गया है। इससे 48.2 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर असर पड़ेगा। ट्रंप टैरिफ की वजह से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजारों में काफी महंगे हो जाएंगे, जिससे घरेलू निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के प्रतिस्पर्धियों की स्थिति कम टैरिफ के कारण अमेरिकी बाजार में बेहतर होगी। इस चुनौती से निपटने के लिए मोदी सरकार को बड़े स्तर पर प्रयास करने होंगे, अन्यथा न सिर्फ देश की जीडीपी पर असर पड़ेगा, बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने का लक्ष्य भी प्रभावित होगा।

वोंटोबेल में ईएम इक्विटीज के सह-प्रमुख राफेल लुएशर का कहना है कि उच्च टैरिफ भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। इससे अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव में आने वाली भारतीय कंपनियां भी निवेश संबंधी फैसले टाल सकती हैं, जिसका नकारात्मक असर नौकरियों पर पड़ सकता है। कपड़ा, जूते, आभूषण और ऑटो पार्ट्स उद्योगों में अगले 12 महीनों में 10-15 लाख नौकरियां जा सकती हैं। अकेले कपड़ा क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा रोजगार प्रभावित होने की आशंका है। सूरत और मुंबई के रत्न-आभूषण उद्योग में भी एक लाख से ज्यादा नौकरियां जाने का खतरा है। 

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टैरिफ से कई सेक्टर होंगे प्रभावित: बड़े प्रयास की दरकार

  • भारत अमेरिका को 10.3 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात करता है। उच्च टैरिफ की वजह से भारतीय परिधान अमेरिकी बाजार में बांग्लादेश और वियतनाम (इन पर 20 फीसद टैरिफ) के मुकाबले महंगे हो जाएंगे। इससे टेक्सटाइल/परिधान निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में उत्पाद बेचना मुश्किल हो जाएगा।
  • भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) ने कहा, तिरुपुर, नोएडा और सूरत के कपड़ा विनिर्माताओं ने उत्पादन रोक दिया है। यह क्षेत्र वियतनाम और बांग्लादेश के कम लागत वाले प्रतिद्वंद्वियों के सामने पिछड़ रहा है।
  • भारत 12 अरब डॉलर का रत्न-आभूषण अमेरिका को निर्यात करता है। अतिरिक्त टैरिफ की वजह से हीरे और सोने के निर्यात में गिरावट आएगी, जबकि चीन को बढ़त मिलेगी।
  • अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा, देश की निर्यात अर्थव्यवस्था में यह उद्योग एक प्रमुख योगदानकर्ता है। उच्च टैरिफ से हस्तनिर्मित आभूषणों के निर्यात पर भारी असर पड़ सकता है। हो सकता है कि ये उत्पाद अब वहां स्वीकार या बेचे न जाएं। अगर ऐसा हुआ, तो एक लाख नौकरियां झटके में चली जाएंगी।
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  • भारत 127 देशों को करीब 60 लाख टन बासमती चावल निर्यात करता है। इसमें से करीब 2.70 लाख टन यानी चार फीसदी बासमती चावल अमेरिका जाता है। अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ ने बासमती चावल निर्यातकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन बड़े नुकसान की आशंका नहीं है।
  • निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका को निर्यात होने वाले 2.70 लाख टन चावल को अन्य देशों में खपाना बड़ी बात नहीं है। इसके लिए नए बाजार को तलाश कर उसकी भरपाई आसानी से की जा सकती है।
  • ऑल इडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान से ही बासमती चावल खरीदता है। लेकिन, पाकिस्तान अमेरिकी जरूरतें पूरी करने में सक्षम नहीं है, क्योंकि इस्लामाबाद के कुल करीब 9 लाख टन चावल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 50 से 60 हजार टन है।
जवाबी कार्रवाई के विकल्प
  • अमेरिकी आयात (ऊर्जा, रक्षा और कृषि सामान) बढ़ाने की कोशिश, ताकि व्यापार घाटा कम हो और कूटनीतिक रास्ता खुले।
  • प्रभावित निर्यातकों के लिए प्रोत्साहन। नए एफटीए के जरिये बाजार विविधीकरण।
  • भारत अमेरिकी कृषि, व्हिस्की, मेडिकल डिवाइस और ऊर्जा पर जवाबी टैरिफ लगाए। लेकिन, अमेरिका का भारत को निर्यात सिर्फ 45 अरब डॉलर है। इनकी महंगाई से कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
  • भारत टैरिफ को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चुनौती दे सकता है, लेकिन वहां कुछ होना मुश्किल है।
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देश की जीडीपी में अगले 12-18 महीनों में 0.2-1.1 फीसदी की गिरावट आ सकती है, क्योंकि ट्रंप टैरिफ से भारत के कुल माल निर्यात का करीब 55 फीसद हिस्सा प्रभावित होने की आंशका है। मूडीज, नोमुरा और सिटीग्रुप का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.5 फीसदी से नीचे जा सकती है, जिससे राजकोषीय घाटा और उपभोक्ता विश्वास प्रभावित होगा।
फिच रेटिंग्स ने 2025-26 के लिए वृद्धि दर अनुमान को 6.4 फीसदी से घटाकर 6.3 फीसदी कर दिया है।
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शेयर बाजार: और गहराएगी गिरावट
50 फीसदी टैरिफ की पुष्टि और व्यापार वार्ता रद्द होने से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली की, जिससे ऑटो, धातु और रियल्टी शेयरों में 1-2 फीसदी की गिरावट आई। सेंसेक्स 849 और निफ्टी 255 अंक टूट गया। रुपये की कमजोरी और निर्यात कर्ज से बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। यूरोप एवं मध्य पूर्व जैसे अन्य व्यापारिक साझेदारों की अप्रत्याशित प्रतिक्रिया से बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है।
आपूर्ति होगी बाधित, ऑर्डर रद्द
अमेरिकी आयातकों ने कपड़ा, ऑटो पार्ट्स, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पादों के भारतीय ऑर्डर रद्द करने शुरू कर दिए हैं। तिरुपुर, नोएडा और सूरत के कपड़ा निर्माताओं ने उत्पादन रोक दिया है। इससे भारत में इन्वेंट्री जमा होने, कार्यशील पूंजी की कमी और उत्पादन ठप होने का खतरा बढ़ गया है।
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कंपनियों की कमाई और कर्ज पर संकट
निर्यात करने वाली कंपनियों (ऑटो, स्टील, उपभोक्ता सामान) की कमाई घटेगी। निर्यातकों के कर्ज और स्टॉक की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे बैंकों एवं एनबीएफसी में एनपीए (फंसा कर्ज) का जोखिम बढ़ने का खतरा है।
वैश्विक छवि को नुकसान
ट्रंप टैरिफ ने अमेरिका के साथ भारत की पसंदीदा साझेदार छवि को तगड़ा झटका लगा है। वैश्विक निवेशक भारत को व्यापार झटकों के प्रति कमजोर मान रहे हैं, जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है। रूसी तेल खरीद के कारण भारत को निशाना बनाया जाना उसकी रणनीतिक स्वायत्तता को कमजोर करने वाला कदम माना जा रहा है।
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ट्रंप की धमकियों के बावजूद भारत में विस्तार धीमा नहीं करेगी एपल
भारत में आईफोन नहीं बनाने की ट्रंप की चेतावनी के बावजूद एपल अपना विस्तार तेज करने वाली है। वह भारत में आईफोन की उत्पादन क्षमता सालाना 4 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करेगी। इस पर 2.5 अरब डॉलर (21,500 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। कंपनी का अतिरिक्त उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा निर्यात के लिए है। खासकर अमेरिका को। कंपनी ने भारत में जल्द लॉन्च होने वाले आईफोन 17 की असेंबलिंग शुरू कर दी है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, एपल की भारत में निवेश की योजना में कोई बदलाव नहीं होगा। विस्तार पहले की योजना के अनुसार जारी रहेगा। भारत में एपल के विस्तार को उसके प्रमुख विक्रेताओं ताइवानी आपूर्तिकर्ता फॉक्सकॉन, टाटा समूह की विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन का समर्थन प्राप्त है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल को भारत में आईफोन नहीं बनाने की चेतावनी दी है|
अमेरिका में बिक रहे आईफोन भारत में बने
एपल सीईओ टिम कुक ने 31 जुलाई को कहा कि जनवरी-मार्च तिमाही में अमेरिका में बेचे गए अधिकांश आईफोन भारत में बने थे। पिछले साल भारत से 17 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन निर्यात किए। चीन अब बड़े पैमाने पर गैर-अमेरिकी बाजारों में सेवाएं दे रहा है।
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अमेरिकी बाजारों में भारतीय उत्पादों की घटेगी मांग, 15 लाख रोजगार पर संकट
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कई देशों में तनाव के बीच भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी का उच्च अमेरिकी टैरिफ बुधवार से लागू हो जाएगा। इससे अमेरिका को भारत से निर्यात किए जाने वाले करीब 48.2 अरब डॉलर के उत्पादों पर असर पड़ेगा। जिन क्षेत्रों पर इस टैरिफ का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, उनमें वस्त्र, परिधान, रत्न-आभूषण, झींगा, चमड़ा व जूते-चप्पल, पशु उत्पाद, रसायन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, दवा, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है।
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छह माह का रोडमैप तैयार; नए विकल्प तलाश रही सरकार

अमेरिका के मनमाने टैरिफ से निपटने के लिए भारत ने रणनीति तैयार कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों और वित्त एवं वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की। इसमें निर्यातकों व कामगारों के लिए राहत पैकेज का रोडमैप तैयार किया गया। इसमें  आपातकालीन ऋण, निर्यातकों को एकमुश्त राहत और कामगारों को सुरक्षा देना शामिल है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार टैरिफ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों से जुड़े उद्यमियों, निर्यातकों व कामगारों के लिए कम से कम छह महीने के राहत पैकेज की घोषणा बुधवार को या इसी हफ्ते कर सकती है। बैठक में अमेरिकी टैरिफ से कपड़ा, चमड़ा, खिलौना, रसायन, प्लास्टिक और खिलौना जैसे उत्पादों के निर्यात पर होने वाले असर की समीक्षा की गई।

इसमें तय किया गया कि इन क्षेत्रों को नया बाजार उपलब्ध कराने तक राहत पैकेज दिया जाए। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का विकल्प ढूंढ़ लिया गया तो यह संकट अधिकतम छह महीने तक रहेगा। ऐसे में टैरिफ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों को कम से कम इतने समय तक राहत दी जाएगी। 

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Author: ILMA NEWSINDIA

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