Emergency: आपातकाल के दौर में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने आलोचक जयप्रकाश नारायण के इलाज के लिए 90 हजार रुपये का दान दिया था। जेल में रहते हुए जेपी की तबीयत खराब हो गई थी और उन्हें डायलिसिस मशीन की जरूरत थी, जिसके लिए देश-विदेश में पैसा जुटाया जा रहा था। हालांकि जेपी ने इंदिरा गांधी का चेक वापस कर दिया, लेकिन प्रवासी भारतीयों ने मिलकर पांच लाख रुपये इकट्ठे कर जेपी के लिए मशीन खरीदी थी।

आपातकाल के दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने सबसे बड़े आलोचक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के उपचार के लिए 90 हजार रुपये की बड़ी रकम दान की थी। जेपी उस समय आपातकाल के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के नेता थे। यह खुलासा एक नई किताब में हुआ है। इस किताब के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने यह दान उस समय किया, जब जेपी की तबीयत बहुत खराब हो गई थी और उन्हें एक जीवन रक्षक पोर्टेबल डायलिसिस मशीन की सख्त आवश्यकता थी।
जेपी को 26 जून 1975 को गिरफ्तार किया गया था। उसी रात देश में आपातकाल लगाया गया था। उन्हें चंडीगढ़ में पांच महीने तक हिरासत में रखा गया और फिर नवंबर में 30 दिन की पैरोल पर छोड़ा गया। किताब ‘द कॉन्शियस नेटवर्क: अ क्रॉनिकल ऑफ रेसिस्टेंस टू अ डिक्टेटरशिप’ के लेखक सुगाता श्रीनिवासराजू बताते हैं कि जेल में रहते हुए जेपी के गुर्दे (किडनी) खराब हो गए थे और उन्हें जिंदगीभर डायलिसिस की जरूरत थी।
इंदिरा गांधी ने दान के रूप में भेजा चेक
इस किताब में बताया गया है कि इलाज का खर्च और नियमित डायलिसिस की चिंता बढ़ने लगी थी। इसलिए यह तय किया गया कि अस्पताल के बजाय एक पोर्टेबल डायलिसिस मशीन लेना बेहतर होगा। लेकिन जेपी ने सरकार की मदद लेने से मना कर दिया। इसलिए उनके समर्थकों ने पैसा जुटाना शुरू किया। जैसे ही जेपी की खराब तबीयत की खबर फैली, भारत और विदेश में उनके समर्थकों ने पैसे इकट्ठा करने शुरू किए। योजना थी कि हर व्यक्ति से एक रुपया लिया जाए और मशीन खरीदी जाए, लेकिन पैसा धीरे-धीरे आ रहा था। इसी बीच इंदिरा गांधी को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने एक बड़ा चेक दान के रूप में भेजा।
आईएफडी ने जेपी से कहा- लौटा दें पैसा
लेकिन अमेरिका में बनी एक प्रवासी संस्था ‘इंडियंस फॉर डेमोक्रेसी (आईएफडी)’ इस बात से परेशान हो गई कि इंदिरा गांधी ने दान दिया है। उन्होंने गांधी पीस फाउंडेशन के राधाकृष्ण से कहा कि वह यह पैसा वापस कर दें। आईएफडी के सदस्य आनंद कुमार ने कहा कि उन्होंने साफ कहा कि अगर यह पैसा स्वीकार किया गया, तो जेपी के समर्थक बहुत निराश होंगे। उन्होंने जेपी से भी गुजारिश की कि वह यह चेक वापस कर दें। आखिरकार यह पैसा आईएफडी के कहने पर लौटा दिया गया।
प्रवासी भारतीयों ने दुनियाभर से जुटाए पांच लाख
इसके बाद आईएफडी ने दुनियाभर में अपील कर पांच लाख (उस समय करीब 65,000 अमेरिकी डॉलर) जमा किए ताकि जेपी के लिए पोर्टेबल डायलिसिस मशीन खरीदी जा सके और उसका रखरखाव हो सके।
इंदिरा गांधी को लिखे पत्र में जेपी ने क्या कहा
जेपी ने 11 जून 1976 को एक पत्र में इंदिरा गांधी को लिखा, जिसमें उन्होंने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए दान अस्वीकार करने की बात कही। उन्होंने लिखा कि वह समझते हैं कि यह रकम इंदिरा गांधी के व्यक्तिगत खाते से दी गई है, लेकिन बाद में पता चला कि यह प्रधानमंत्री राहत कोष से थी। जेपी ने पत्र में कहा कि जब तक प्रधानमंत्री राहत कोष से यह चेक आया, तब तक जनता से पहले ही तीन लाख रुपये से ज्यादा इकट्ठा हो चुके थे। उन्होंने इंदिरा गांधी से यह भी कहा कि वह उन्हें गलत न समझें और न ही ऐसा सोचें कि मैं आपके भाव के लिए आपका शुक्रिया अदा नहीं करता।
ऑनलाइन-ऑफलाइन उपलब्ध है किताब
किताब ‘द कॉन्शियस नेटवर्क’ आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर भारतीय प्रवासियों के योगदान की अनछुई कहानी सामने लाती है। इसमें बताया गया है कि कैसे अमेरिका में बसे भारतीयों ने तानाशाही के खिलाफ वैश्विक स्तर पर आवाज उठाई। यह किताब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने प्रकाशित की है और 1,299 रुपये में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह उपलब्ध है। 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो पर आपातकाल लगाने की घोषणा की थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनके चुनाव को रद्द करने वाले हाईकोर्ट के फैसले पर कुछ समय के लिए रोक लगाई थी। यह आपातकाल 21 मार्च 1977 को खत्म हुआ।
Author: planetnewsindia
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