Indore News: इंदौर में चोरी की वारदातें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस का डर खत्म हो रहा है और शहर के बाहर से आने वाले गैंग लगातार सक्रिय हैं। दिन में खुलेआम चोरी करने में भी वे डरते नहीं हैं।

खरगोन गए थे मनीष चौधरी, घुस गया चोर
साईं मंगल नगर निवासी मनीष चौधरी ने पुलिस को बताया कि जब वह निजी कार्य से खरगोन गए हुए थे, उसी दौरान अज्ञात चोर ने उनके घर के दरवाजे का ताला तोड़कर लाखों रुपये नगद पर हाथ साफ कर दिया। सीसीटीवी फुटेज में चोर की पूरी गतिविधि कैद हुई है जिसमें स्पष्ट दिखाई देता है कि चोर पहले काफी देर तक घर के आसपास टहलता रहा। यह घटना बताती है कि चोर अब सिर्फ सुनसान इलाकों को नहीं, बल्कि सुरक्षित माने जाने वाली कॉलोनियों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि क्या हमारी सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
क्या पर्याप्त है सुरक्षा व्यवस्था
चोरी की घटना के बाद पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोर की पहचान कर तलाश की जा रही है। लेकिन लगातार हो रही इस तरह की वारदातों के बावजूद पुलिस की गश्त और सतर्कता पर सवाल उठना लाजमी है। नागरिकों का कहना है कि पुलिस केवल घटना के बाद सक्रिय होती है, जबकि पूर्व-सतर्कता का अभाव है। इन घटनाओं से यह साफ हो जाता है कि केवल पुलिस पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को भी अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक होना होगा।
पुलिस देख रही सीसीटीवी
एसीपी देवेंद्र सिंह धुर्वे ने जानकारी दी कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि घटनाएं घटने के बाद ही पुलिस सक्रिय होती है, जबकि समय रहते रोकथाम के प्रयास नजर नहीं आते।
न्यायिक प्रक्रिया तेज होना चाहिए
क्रिमिनोलॉजिस्ट ड़ॉ. विनीत दुबे बताते हैं कि चोरों के बढ़ते दुस्साहस का एक कारण यह भी है कि उन्हें पता है कि न्यायिक प्रक्रिया लंबी है और पकड़े जाने की संभावना कम है। सुरक्षा तकनीक का सही उपयोग और स्थानीय स्तर पर सतर्कता बहुत जरूरी है। सुरक्षा विशेषज्ञ आर.के. मेहरा कहते हैं कि आधुनिक कॉलोनियों में डिजिटल सिक्योरिटी को अपनाना अब जरूरी हो गया है। स्मार्ट डोर लॉक, मोशन सेंसर और मोबाइल अलर्ट जैसे उपाय काफी कारगर साबित हो सकते हैं।
रहवासियों ने बनाया निगरानी ग्रुप
विजय नगर निवासी संध्या अग्रवाल कहती हैं कि हमारे मोहल्ले में गार्ड़ तो हैं लेकिन रात में अक्सर सोते मिलते हैं। हम चाहते हैं कि पुलिस और कॉलोनी समितियां मिलकर एक ठोस प्लान बनाएं। न्यू पलासिया में रहने वाले रवि मिश्रा कहते हैं कि सीसीटीवी सिर्फ लगाने से कुछ नहीं होता, उनकी मॉनिटरिंग और रखरखाव भी जरूरी है। हमने कॉलोनी में पड़ोसी निगरानी ग्रुप बनाया है, जो रात में गश्त करता है।
यह उपाय करना होंगे
इंदौर में जिस तरह से चोरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं शहर में कॉलोनी समितियों को सुरक्षा नीति तैयार करनी चाहिए। स्थानीय थाना क्षेत्र में समय-समय पर नागरिकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए। पुलिस और पब्लिक के बीच संवाद बढ़ना चाहिए और सामूहिक बैठकें और पुलिस के मोबाइल ऐप का प्रचार होना चाहिए। स्मार्ट सिटी इंटीग्रेशन के तहत हर कॉलोनी को स्मार्ट निगरानी प्रणाली से जोड़ना चाहिए। सजा में तेजी होनी चाहिए और त्वरित न्याय के लिए व्यवस्था होना चाहिए। इन सभी उपायों से हम इंदौर को सुरक्षित बना सकते हैं। शहरवासियों का मानना है कि इंदौर जैसे शहर में जहां विकास की गति तेज है, वहां अपराधियों की भी सक्रियता बढ़ रही है। ऐसे में पुलिस, प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करने की आवश्यकता है। जागरूकता, तकनीक और सामूहिक भागीदारी ही इस चुनौती का समाधान बन सकती है।
