कोच मनीष ओझा ने कहा कि वैभव एक स्वाभाविक रूप से प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं और उनकी सोच बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा, ‘उसे जो भी सुझाया जाता है, वह तुरंत सीख जाता है।’

वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा को उम्मीद है कि उनका 14 वर्षीय शिष्य अगले एक या दो वर्षों में भारत की टी-20 टीम में जगह बना लेगा। वैभव ने सोमवार को 38 गेंदों में 101 रन की पारी खेलकर आईपीएल के सबसे युवा शतकवीर बनने का रिकॉर्ड बनाया। उनकी उम्र 14 साल और 32 दिन है। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए 11 छक्के और सात चौके लगाए और राजस्थान रॉयल्स को जयपुर में आठ विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
‘मेरे लिए गर्व की बात है’
कोच मनीष ओझा ने मैच के बाद कहा, ‘एक कोच के तौर पर यह मेरे लिए गर्व की बात है। बिहार जैसे राज्य के लिए जो खेलों में मजबूत नहीं है, यह सूरज की किरण की तरह है। उन्होंने कई लोगों को प्रेरित किया होगा। उन्होंने बिहार को भारत में क्रिकेट के नक्शे पर ला खड़ा किया है। मुझे लगता है कि अगर वह इसी तरह खेलते रहे, तो वह निश्चित रूप से एक या दो साल में भारत की टी20 टीम में जगह बना लेंगे।’
कोच मनीष ओझा ने मैच के बाद कहा, ‘एक कोच के तौर पर यह मेरे लिए गर्व की बात है। बिहार जैसे राज्य के लिए जो खेलों में मजबूत नहीं है, यह सूरज की किरण की तरह है। उन्होंने कई लोगों को प्रेरित किया होगा। उन्होंने बिहार को भारत में क्रिकेट के नक्शे पर ला खड़ा किया है। मुझे लगता है कि अगर वह इसी तरह खेलते रहे, तो वह निश्चित रूप से एक या दो साल में भारत की टी20 टीम में जगह बना लेंगे।’
‘वैभव को बड़े शॉट खेलना पसंद’
सूर्यवंशी पहले ही भारत की अंडर-19 टीम के लिए खेल चुके हैं और जनवरी 2024 में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया था। ओझा ने कहा कि वैभव एक स्वाभाविक रूप से प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं और उनकी सोच बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा, ‘हमने उसे कोचिंग दी है, लेकिन उसके पास प्राकृतिक प्रतिभा है। उसके पास सीखने का जज्बा है। उसे जो भी सुझाया जाता है, वह तुरंत सीख जाता है। वह शुरू से ही बहुत आक्रामक खिलाड़ी रहा है। उसे शॉट खेलना पसंद है।’
सूर्यवंशी पहले ही भारत की अंडर-19 टीम के लिए खेल चुके हैं और जनवरी 2024 में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया था। ओझा ने कहा कि वैभव एक स्वाभाविक रूप से प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं और उनकी सोच बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा, ‘हमने उसे कोचिंग दी है, लेकिन उसके पास प्राकृतिक प्रतिभा है। उसके पास सीखने का जज्बा है। उसे जो भी सुझाया जाता है, वह तुरंत सीख जाता है। वह शुरू से ही बहुत आक्रामक खिलाड़ी रहा है। उसे शॉट खेलना पसंद है।’
‘उनके दिमाग में शॉट को लेकर स्पष्टता’
ओझा ने बताया, ‘दो साल पहले अकादमी में एक अभ्यास सत्र था। मैंने उससे कहा कि तुम एक और दो रन क्यों नहीं लेते। उसने कहा कि अगर मैं छक्के मार सकता हूं, तो सिंगल की कोई जरूरत नहीं है।’ कोच ने कहा, ‘शुरुआती चरण से ही उसके दिमाग में स्पष्टता थी। उसे खेलने के तरीके और खेल के प्रति दृष्टिकोण के बारे में स्पष्ट विचार प्रक्रिया है।’
ओझा ने बताया, ‘दो साल पहले अकादमी में एक अभ्यास सत्र था। मैंने उससे कहा कि तुम एक और दो रन क्यों नहीं लेते। उसने कहा कि अगर मैं छक्के मार सकता हूं, तो सिंगल की कोई जरूरत नहीं है।’ कोच ने कहा, ‘शुरुआती चरण से ही उसके दिमाग में स्पष्टता थी। उसे खेलने के तरीके और खेल के प्रति दृष्टिकोण के बारे में स्पष्ट विचार प्रक्रिया है।’
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Author: planetnewsindia
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