बिहार के महाकांड: किसी का गला रेता, कहीं छाती काटी, कोई गोलियों से भूना गया; आधी रात को ऐसे चला था खूनी खेल

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बिहार चुनाव से जुड़ी हमारी खास पेशकश ‘बिहार के महाकांड’ सीरीज के चौथे भाग में आज इसी लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार की कहानी। लक्ष्मणपुर बाथे में हुए नरसंहार की पृष्ठभूमि क्या रही थी? रणवीर सेना ने किस तरह इस हत्याकांड की साजिश रची? कैसे बथानी टोला नरसंहार की तरह ही लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार में भी अदालत का फैसला पीड़ितों को राहत नहीं दिला पाया

बिहार के बतन बीघा में 1 दिसंबर 1997 की रात दहशत की रात साबित हुई। वजह थी मगध प्रमंडल के जिले जहानाबाद में दो गांवों- लक्ष्मणपुर-बाथे में हुआ नरसंहार, जिसमें 58 लोगों की जान चली गई थी। यह घटना कितनी निर्ममता से अंजाम दी गई थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हत्यारों ने आधी रात को गहरी नींद में सोए लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना में कातिलों ने महिलाओं और बच्चों तक को नहीं छोड़ा था। इसे बिहार के सबसे बड़े नरसंहारों में माना जाता है। हालांकि, 2013 में जब पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला दिया तो इस पूरे मामले में कोई दोषी ही नहीं मिला। यानी यह पूरा केस ऐसा था, जैसे नरसंहार तो हुआ, पर किसी भी पकड़े गए आरोपी ने उसे अंजाम नहीं दिया।

 

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Author: planetnewsindia

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