UP News: गाजीपुर से चार जेलों में भेजे गए 16 बंदी-कैदी, जेलर व डिप्टी जेलर के खिलाफ एक्शन के बाद मचा हड़कंप

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Ghazipur News: गाजीपुर जिला जेल में मोबाइल फोन से बंदी व कैदियों को बात कराने के मामले में जेलर व डिप्टी जेलर के खिलाफ कार्रवाई से हड़कंप मचा है। वहीं मामले का खुलासा होने के साथ ही गाजीपुर से चार जेलों में 16 बंदी और कैदी भेजे गए।

Ghazipur Jail Calling Case 16 prisoners sent to four jails from Ghazipur

जेलर और डिप्टी जेलर के निलंबन के साथ ही कुल 16 बंदियों और कैदियों को वाराणसी, आजमगढ़ और जौनपुर की चार जेलों में भेजा गया है। जेल प्रशासन ने 10 को और जिलाधिकारी ने प्रशासनिक आधार पर छह को आसपास की जेलों में भेजा है।

इस कार्रवाई से जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों की मानें तो ये सभी चर्चित बंदी कैदी हैं। इनमें कई नाम गुमनाम पत्र में भी है। इस पत्र की डीआईजी जेल के स्तर से जांच कराई जा रही है

डीआईजी जेल के मुताबिक, जेल अधीक्षक कार्यालय में बंदी राइटर संतोष कुमार सिंह उर्फ पवन सिंह समेत 10 बंदी-कैदियों को केंद्रीय कारागार वाराणसी भेजा गया है। जेल से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, जिन 10 वंदियों कैदियों को यहां से भेजा गया है।

उनमें राम अवतार, श्रीपत, राकेश सिंह, संतोष सिंह, रमेश कुमार, राम बचन, विशाल मिश्रा, हरे राम, अशोक प्रजापति भी शामिल हैं। डीएम आर्यका अखौरी ने प्रशासनिक आधार पर विनोद गुप्ता, बजरंगी यादव, सोनू, सुधीर पासी, शंकर पांडेय, प्यारेलाल को दूसरे कारागार में भेजा है। ये बंदी-कैदी वाराणसी सेंटर जेल, वाराणसी जिला जेल, जौनपुर जिला जेल, आजमगढ़ जिला जेल भेजे गए हैं।

 

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Author: planetnewsindia

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सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।