गांव रूदायन में निकली मां काली शोभायात्रा

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Sunil Kumar

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गांव रुदायन में मां काली का मेला निकाला गया, जिसमें काली के स्वरूप ने पूरे गांव में भ्रमण किया। मेले में भव्य झांकियां आकर्षण का केन्द्र बनी हुई थीं।
गांव रुदायन में काली मेला श्री रामचैक मंदिर परिसर से आचार्य शिव कुमार शर्मा के मंत्रोच्चारण एवं उस्ताद मोहन किशोर शर्मा एवं विद्यासागर के नेतृत्व में शुरू किया गया। मेला गोला कुंआ मंदिर परिसर से शुरू होकर चामण मंदिर, श्री हनुमान पक्का मंदिर, पथवारी आदि के अलावा पूरे गांव में भ्रमण किया। काली मेले में भगवान शिव, राधाकृष्ण, और शिव के भूत प्रेतों की झांकियां थीं। बैंड बाजों से निकलने वाली मधुर धुन से गांव का वातावरण भक्तिमय हो गया। ग्रामीणों ने मां काली की आरती उतारकर एवं पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। काली का स्वरूप भरत उपाध्याय ने धारण किया तो लांगुरा का पाठ लालू ने लिया। वहीं खरदूषण अंकित एवं कान्हा बने मां काली का खप्पर पप्पू ने संभाला, इस दौरान काली मेला कमेटी अध्यक्ष अशोक कुमार चैधरी के साथ अन्य पदाधिकारी एवं मां काली भक्त मौजूद रहे। दूसरी ओर गांव छौंड़ा में शनिवार को मेला महाकाली संघ की ओर से भव्य काली मेले का आयोजन किया गया। मेले का उद्घाटन जवाहरलाल पाठक ने मां काली स्वरूप की आरती उतारने के बाद विधिवत पूजा अर्चना एवं फीता काटकर किया। गढ़ौआ तक पहुंची। रास्ते में भक्तों ने जगह-जगह मां काली की आरती उतारी और प्रसाद का वितरण किया। दोनों गांव में सुरक्षा व्यवस्था की कमान प्रभारी निरीक्षक नरेश सिंह एवं क्राईम इंचार्ज महताव हसन और कस्बा इंचार्ज यतेन्द्र सिंह ने मय फोर्स के संभाली। यहां भी मेला कमेटी के पदाधिकारी एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

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Author: Sunil Kumar

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संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।