प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल के हॉस्टल में नर्सिंग छात्रा ने खुदकुशी कर ली। कौशाम्बी की रहने जीएनएम प्रथम वर्ष की छात्रा ने फंदा लगाकर जान दी। खुदकुशी से पहले उसने सुसाइड नोट भी लिखा।

प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल स्थित नर्सिंग हॉस्टल में बुधवार सुबह जीएनएम प्रथम वर्ष की छात्रा प्रीति सरोज (20) ने पंखे पर फंदे से लटक कर जान दे दी। सुसाइड नोट में उसने लिखा कि कान और शरीर की खुजली की बीमारी से तंग आ चुकी हूं… भगवान ने बहुत दुख दिया है, इसलिए मौत को गले लगा रही हूं। छात्रा के चचेरे भाई अनुज सरोज ने खुजली का मजाक उड़ाने और ताने मारने के कारण खुदकुशी को मजबूर होने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
कौशाम्बी के संदीपनघाट थानाक्षेत्र के फरीदपुर की प्रीति के खुदकुशी करने की बात सुबह 10:15 बजे पता लगी। वह नर्सिंग हॉस्टल में रहकर जीएनएम की पढ़ाई कर रही थी। कमरे में कुल छह छात्राएं रहती थीं। इनमें चार छात्राएं महाशिवरात्रि पर मंदिर चली गईं थीं। एक सहेली साथ थी। सहेली के मुताबिक, सुबह करीब 10 बजे प्रीति ने उससे कहा कि पूरे शरीर में खुजली की दवा लगानी है।

सूत्रों के मुताबिक, सुसाइड नोट में उसने लिखा है कि मैं डॉक्टर बनना चाहती थी। लेकिन, मेरा सपना अधूरा रह गया। मैं बहुत परेशान होकर सुसाइड करने जा रही हूं। कान की बीमारी से परेशान हूं… सुनने में तकलीफ होती है। पूरे शरीर में खुजली रहती है। इसे अब और नहीं झेल सकती। … मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। कोतवाली थाना प्रभारी रोहित तिवारी के मुताबिक, प्रीति के नोटबुक में आधे पेज का सुसाइड नोट मिला है। घटना के हर पहलू की जांच हो रही है। वहीं, नर्सिंग कॉलेज की प्रधानाचार्य जयकुमारी जायसवाल ने ताने मारने या मजाक उड़ाने जैसी सरोजा जानकारी से इंकार किया है। कहा, घटना की वह भी जांच करा रही हैं।

प्रीति के राजमिस्त्री पिता शत्रुघन सरोज अपनी पत्नी के साथ एसआरएन पहुंचे। यहां आए तो मौत की बात सुन चीख पड़े। उन्होंने बताया कि उनका परिवार बेहद गरीब है। जैसे-तैसे बेटी को पढ़ा रहे थे। 12 फरवरी को कान में तकलीफ बढ़ने पर उसे घर ले गए थे। 23 फरवरी को वह लौट गई थी। बेटी ने आज सुबह करीब 7:30 बजे फोन करके घर में रखा फिटनेस सर्टिफिकेट मंगाया था। वही लेकर जा रहे थे कि यह मनहूस खबर आ गई।

प्रीति का शव देख मां शांति देवी फफक पड़ीं। बोलीं, कहती थी गरीबी से लड़ना सीखो… खुद ही हार गई। तुमने तो डॉक्टर बनकर गरीबों की मदद का वादा किया था, उसे भी नहीं सोचा। वह बार-बार पूछतीं, आखिर बेटी तूने ऐसा कदम क्यों उठाया। घर में प्रीति दूसरे नंबर की संतान थी।
