संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए वीआईपी की लंबी कतार है। मथुरा में अधिकारियों के पास रोजाना 100 से अधिक कॉल आते हैं। इच्छा सिर्फ एक ही है कि किसी भी तरह उन्हें संत प्रेमानंद से मिलवा दिया जाए।

हेलाे…मैं मंत्री का पीआरओ बोल रहा हूं…साहब को प्रेमानंद महाराज से मिलना है…नंबर लगवा दीजिए। ऐसे ही तमाम वीआईपी नंबर लगवाने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के अधिकारियों को कॉल कर रहे हैं। इनमें विधान परिषद सदस्य से लेकर कैबिनेट मंत्री तक शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार उनके मोबाइल पर प्रतिदिन सौ से अधिक कॉल आते हैं। वह नंबर लगवाने के लिए महाराजजी के शिष्यों से संपर्क करने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
दरअसल, प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए रात दो बजे ही वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालु जुटने लगते हैं। वह अपने आश्रम से शिष्यों के साथ पैदल परिक्रमा को प्रतिदिन निकलते हैं, इससे पहले ही सड़कों पर उनके दर्शन के लिए सैकड़ों की संख्या में अनुयायी पहुंच जाते हैं। फिर आश्रम में दिनभर दर्शन के लिए भक्त जुटे रहते हैं। इसलिए प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से नंबर लगाना शुरू किया।
वृंदावन रस महिमा ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन नंबर लग सकता है, जबकि ऑफलाइन के लिए आश्रम जाना पड़ेगा। प्रेमानंद महाराज की भक्तिभाव और आध्यात्मिक ज्ञान की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। उनके दर्शन के लिए न केवल आम लोग बल्कि नेता, अधिकारी और प्रतिष्ठित व्यक्ति भी पहुंचते हैं। यही कारण है कि लखनऊ-दिल्ली में बैठे मंत्री व नेता सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के अधिकारियों को नंबर लगवाने के लिए कॉल कर रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार वीआईपी प्रेमानंद महाराज से मिलने की इच्छा जताते हैं। यह बात सुनने के बाद अधिकारी वीआईपी के पीआरओ को प्रेमानंद महाराज के आश्रम या किसी संत से संपर्क करने की राय देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार का कहना है कि अगर कोई वीआईपी प्रेमानंद से मिलने के लिए आते हैं तो उन्हें प्रॉटोकॉल दिया जाता है, जबकि उनसे मिलने के लिए शिष्यों से संपर्क करें। महाराज के दर्शन के लिए नंबर लगवाने का काम अधिकारियों का नहीं है।
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