सुनसान इलाका, नदी का किनारा और सिर कटी लाश… पुलिस के लिए पहेली बना महिला के कत्ल का ये मामला

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पुणे पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि महिला की लाश नदी के किनारे चंदननगर इलाके में मिली है. प्रारंभिक जांच के अनुसार, महिला का सिर कटा हुआ था और उसके हाथ-पैर कंधे और कूल्हे के जोड़ से अलग कर दिए गए थे. साफ दिख रहा था कि उसे बेरहमी के साथ कत्ल किया गया है.

Pune Headless Body Murder Mystery: महाराष्ट्र के पुणे में एक महिला की सिर कटी लाश मिलने से सनसनी फैल गई. महिला की लाश सुनसान इलाके में मुला नदी के किनारे पर मिली. बताया जा रहा है कि किसी राहगीर ने लाश देखने के बाद पुलिस को इस बात की सूचना दी थी. अब पुलिस इस मामले की छानबीन में जुट गई है. पुणे पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस सनसनीखेज वारदात के बारे में जानकारी देते हुए पीटीआई को बताया कि मुला नदी के किनारे एक महिला का सिर कटा शव मिला है. उन्होंने कहा कि पुलिस नियंत्रण कक्ष को सोमवार की सुबह करीब 11 बजे नदी के किनारे लाश मिलने की सूचना मिली थी.

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, नदी के किनारे लाश चंदननगर इलाके में मिली है. प्रारंभिक जांच के अनुसार, महिला का सिर कटा हुआ था और उसके हाथ-पैर कंधे और कूल्हे के जोड़ से अलग कर दिए गए थे. साफ पता चल रहा था कि उसे बेरहमी के साथ कत्ल किया गया है

पुलिस अधिकारी ने आगे बताया कि महिला की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और चंदननगर पुलिस थाने में  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) और 238 (साक्ष्य मिटाने) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

अधिकारी ने बताया कि मृतक महिला की पहचान का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है. यही नहीं, पुलिस ऐसे मामलों की छानबीन भी कर रही है, जिनमें गुमशुदा व्यक्तियों के बारे में शिकायत की गई है या उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई हो. फिलहाल, ये मामला पुलिस के लिए एक पहेली की तरह बन गया है.

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Author: planetnewsindia

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सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।