कौशांबी में पटाखा फैक्टरी विस्फोट मामले में सात पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। इन्हें निलंबित कर दिया गया है। बताते चलें कि विस्फोट में अब तक 11 मौतें हो चुकी हैं। परमिट निलंबित होने के बावजूद अवैध पटाखा फैक्टरी चल रही थी। आगे पढ़ें पूरी खबर…

यूपी के कौशाम्बी में पिपरी थाना क्षेत्र के चिल्ला शाहबाजी गांव में अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के दौरान हुए भीषण विस्फोट के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। लापरवाही बरतने पर पिपरी थाना के तत्कालीन प्रभारी समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। विस्फोट में 11 लोगों की मौत और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
पहले ही निलंबित हो चुका था फैक्टरी संचालक का परमिट
जांच में सामने आया कि अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण का आरोपी नौशाद अली पुत्र निजामुद्दीन, निवासी महमूदपुर मनौरी, थाना पिपरी पहले भी कार्रवाई की जद में आ चुका था। उसके पटाखा निर्माण/भंडारण संबंधी अनुमति को अनियमितता मिलने पर 4 अप्रैल 2024 को निलंबित कर दिया गया था।
इसके बाद भी आरोपी के खिलाफ अक्तूबर 2024 में अवैध पटाखा फैक्टरी चलाने के संबंध में मुकदमा दर्ज किया गया और उसे जेल भेजा गया था। आरोपी के जेल से बाहर आने के बाद भी कथित तौर पर अवैध फैक्टरी दोबारा संचालित की जा रही थी। 31 अगस्त को इसी दौरान हुए विस्फोट में 11 लोगों की जान चली गई।
इन सात पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
घटना के दौरान पिपरी थाने की चौकी चायल के प्रभारी रहे अधिकारियों और तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। निलंबित पुलिसकर्मियों में निरीक्षक शिवचरण राम, उपनिरीक्षक विकास सिंह, उपनिरीक्षक विनय सिंह, उपनिरीक्षक अजीत कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अभिषेक गुप्ता, उपनिरीक्षक मनीष पाल और उपनिरीक्षक अमित द्विवेदी शामिल हैं।
पुलिस महानिरीक्षक प्रयागराज परिक्षेत्र ने प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न करने और कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के मामले में इन सभी को निलंबित किया है।