किसान प्यारा सिंह, उनकी पत्नी सुरिंदर कौर और परिवार के सदस्यों से करीब 32.07 लाख रुपये की वसूली की जानी है। कंपनी की ओर से मकान पर नोटिस चस्पा किया गया, जिसमें समझौते के तहत जमा की जाने वाली राशि 32,06,876 रुपये बताई गई, जबकि कुल रिकवरी राशि 46,28,468 रुपये का भी उल्लेख किया गया।

लुधियाना ग्रामीण के गांव टूसा में मंगलवार तड़के भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एक किसान का घर सील कर दिया गया। यह कार्रवाई अदालत के आदेश पर कर्ज वसूली के लिए की गई। किसान प्यारा सिंह पर करीब 46.28 लाख रुपये का ऋण बकाया था।
सुबह पुलिस ने गांव को चारों तरफ से घेर लिया था और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। शुरुआत में गांव में सनसनी फैल गई, लेकिन आधे घंटे बाद स्पष्ट हुआ कि यह मामला कर्ज वसूली का है। रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और औथम इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के अधिकारियों को विरोध की आशंका के चलते पुलिस सुरक्षा दी गई थी।
प्यारा सिंह, उनकी पत्नी सुरिंदर कौर और परिवार के अन्य सदस्यों पर कुल 32.07 लाख रुपये की वसूली का मामला था। ब्याज बढ़ने के कारण यह राशि 46.28 लाख रुपये तक पहुंच गई। लुधियाना की एक अदालत ने सोमवार को मकान खाली कराने का आदेश दिया था। कार्रवाई के दौरान प्यारा सिंह के परिवार को घर से बाहर कर दिया गया। इसके बाद मकान पर सरकारी सील लगाकर ताला लगा दिया गया।
किसान संगठनों का विरोध और परिवार की स्थिति
कई किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने टूसा पहुंचने का प्रयास किया। हालांकि, भारी पुलिस बल के कारण उन्हें गांव में प्रवेश नहीं करने दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्यारा सिंह परिवार को उम्मीद थी कि किसान संगठन उनका समर्थन करेंगे। परिवार ने पहले करीब दो एकड़ जमीन बेच दी थी और अब ठेके पर खेती करता था।
कई किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने टूसा पहुंचने का प्रयास किया। हालांकि, भारी पुलिस बल के कारण उन्हें गांव में प्रवेश नहीं करने दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्यारा सिंह परिवार को उम्मीद थी कि किसान संगठन उनका समर्थन करेंगे। परिवार ने पहले करीब दो एकड़ जमीन बेच दी थी और अब ठेके पर खेती करता था।
किसानों पर कर्ज का बढ़ता बोझ
यह घटना देश के किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती है। खेती से होने वाली आय अक्सर कर्ज की किस्तों और ब्याज का बोझ उठाने में सक्षम नहीं होती। महंगे बीज, खाद और अन्य खर्च किसानों को कर्ज के जाल में फंसा देते हैं। जब कर्ज वसूली घर की चौखट तक पहुंचती है, तो एक पूरा परिवार प्रभावित होता है।
यह घटना देश के किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती है। खेती से होने वाली आय अक्सर कर्ज की किस्तों और ब्याज का बोझ उठाने में सक्षम नहीं होती। महंगे बीज, खाद और अन्य खर्च किसानों को कर्ज के जाल में फंसा देते हैं। जब कर्ज वसूली घर की चौखट तक पहुंचती है, तो एक पूरा परिवार प्रभावित होता है।