जब ऐसी अव्यवस्थाओं के बारे में सीएमएस डॉ. जगवीर वर्मा से सवाल पूछे गए तो उन्होंने जवाब दिया कि रात भर नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा गार्ड मुस्तैद रहते हैं। उनके अस्पताल में सुरक्षा से समझौता नहीं है। जब उन्हें तस्वीरें दिखाई गईं तो एक पल वे ठहरे फिर बोले कि सोते हुए मिलने पर गार्ड को हटाया दिया जाएगा। वे इस मसले की जांच करेंगे।

अंधेरा होते ही अलीगढ़ के मलखान सिंह जिला अस्पताल में मरीज खुद को वार्ड में बंद कर लेते हैं। यह सुनकर शायद आप यकीन न करें, लेकिन पुरुष से लेकर महिला और इमरजेंसी वार्ड तक रात 11.30 बजे के बाद बंद हो जाते हैं। यहां भर्ती मरीजों में से एक को प्रधान बनाया जाता है और सुरक्षा गार्ड आकर यह कहते हुए उसे ताला थमा देते हैं कि भीतर से लगा लेना। इस मरीज की यह ड्यूटी होती है कि रात में जब सभी मरीज वार्ड में आ जाएं तो वह ताला लगा ले।
अगले दिन जब सीएमएस डॉ. जगवीर वर्मा से सवाल पूछे गए तो उन्होंने जवाब दिया कि रात भर नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा गार्ड मुस्तैद रहते हैं। उनके अस्पताल में सुरक्षा से समझौता नहीं है। जब उन्हें तस्वीरें दिखाई गईं तो एक पल वे ठहरे फिर बोले कि सोते हुए मिलने पर गार्ड को हटाया दिया जाएगा। वे इस मसले की जांच करेंगे।
हैरानी सिर्फ वार्ड तक सीमित नहीं है। जिला अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी भी है। जब सभी वार्ड अंदर से बंद हो जाते हैं तो पुलिस भी चौकी में दिखाई नहीं देती। पड़ताल में संवाददाता ने पाया कि बाहर चौकी की कुंडी लगी है और भीतर झांकने पर देखा कि लाइट जली है, लेकिन कुर्सियां खाली पड़ी हैं। चौकी के दरवाजे पर दो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अगले दिन सिपाही मिला जो बोला कि कुछ रहता है तो कैमरे में देख लेते हैं।
तस्वीरों के पीछे की तस्वीर
मरीजों को अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। इसलिए वे खुद को बंद करने पर सहमत हो जाते हैं। सुरक्षा गार्ड भी नहीं चाहते कि उनका भरोसा बने, क्योंकि अगर ऐसा होगा तो उन्हें रात भर जागना पड़ेगा। पुलिस भी यह मान चुकी है कि चोरी होती रहेगीं। अच्छा यही रहेगा कि मरीज अपनी सुरक्षा स्वयं करे।



