गांव छौंक में मच्छर दिवस की पूर्व संध्या पर मच्छरों के बढ़ते प्रकोप और बीमारियों के प्रति सतर्कता बढ़ाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित मच्छरों का घर खोजो अभियान के तहत बाल वैज्ञानिकों ने गांव-गांव जाकर पड़ताल की और ग्रामीणों को बीमारियों से बचाव के तरीके सिखाए।
बुधवार को चलाए गये अभियान के दौरान बाल वैज्ञानिकों ने गांव के विभिन्न मोहल्लों, गलियों और परिसरों का दौरा किया। टीम ने पानी के जमाव वाले 50 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर मच्छरों के पनपते लार्वा की पहचान की। जांच में सामने आया कि मुख्य रूप से खुली नालियों, गड्ढों, घरों के आसपास जमे पानी, पुराने बर्तनों और पानी की टंकियों में लार्वा भारी संख्या में पनप रहे हैं। जांच के साथ-साथ बाल वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य का सर्वेक्षण कर आंकड़े एकत्रित किए। उन्होंने ग्रामीणों को घर के आसपास पानी न जमा होने देने, हर हफ्ते कूलर व पानी के बर्तनों को साफ कर सुखाने और सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी। डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि समय रहते जमा पानी को हटाकर और स्वच्छता अपनाकर ही मलेरिया और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS




