वाराणसी में हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह हो रही है। 19 इलाकों में जलभराव हो गया है। मणिकर्णिका से दूसरे घाटों का रास्ता बंद हो चुका है। बाबा मसाननाथ का आधा मंदिर जलमग्न हो गया है। गंगा का पानी ऊपर चढ़ने से लकड़ियां गीली हो गईं हैं।

काशी में गंगा-वरुणा का उफान अब डराने लगा है। 19 इलाकों में जलभराव हो गया है। मंगलवार को बारिश के बाद शहर में 2 घंटे तक जाम लग गया। सोमवार से महाश्मशान मणिकर्णिका घाट की छत पर और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है।
लकड़ियां गीली होने से मुखाग्नि में समय भी लग रहा है। जगह कम होने से परिजनों को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। नौका संचालन ठप है। पूरा नमो घाट और दोनों नमस्ते मुद्रा का आधार भाग गंगा में डूब गया। हर घंटे चार सेंटीमीटर प्रति की रफ्तार से गंगा का पानी बढ़ रहा है। 88 घाटों का संपर्क टूट गया है।
मंगलवार शाम सात बजे तक जलस्तर 67.14 मीटर दर्ज किया गया, जबकि दो दिन पहले रविवार की रात 63.56 मीटर था। सोमवार को गंगा का जलस्तर 66.28 मीटर था। अब गंगा चेतावनी बिंदु से सिर्फ तीन मीटर ही दूर रह गई है। गंगा आरती स्थल पांच मीटर तक पीछे खिसका दिया गया है।
मसाननाथ का आधा मंदिर डूबा
मणिकर्णिका से दूसरे घाटों का रास्ता बंद हो चुका है। बाबा मसाननाथ का आधा मंदिर जलमग्न हो गया है। गंगा का पानी ऊपर चढ़ने से लकड़ियां गीली हो गईं हैं। जिससे शवों के जलने में लगने वाला समय भी बढ़ चुका है।
लकड़ी व्यवसायी अखिलेश यादव ने कहा कि छत पर शव यात्रियों के साथ ही कई देखने-घूमने और फोटो खींचने वाले भी पहुंच जाते हैं, जिससे छत पर जगह कम पड़ जा रही है। सिंधिया घाट पर रत्नेश्वर महादेव मंदिर और दत्रात्रेय चरण पादुका मंदिर अखाड़ा गंगा में समा चुका है।
मां का शव फूंकने आए, आरोप- मांगे 10-12 हजार रुपये
हरिश्चंद्र घाट की गलियों में मलबा और गंदगी होने के चलते शवदाह में दिक्कत आ रही है। हरिश्चंद्र घाट पर मां की अंत्येष्टि करने आए कैमूर के जसराम ने कहा कि काफी देर तक शव फूंकने की जगह नहीं मिली। कुछ लोगों ने 10 से 12 हजार की मांग कर डाली, ये भी कहा कि नहीं तो लाश वापस लेकर चले जाओ। बाबतपुर एयरपोर्ट के मेन गेट से अंदर जाने वाले पर पानी भरा रहा।
एक घंटे में 44.2 मिमी बारिश, गर्मी से मिली राहत
काशी में मंगलवार को बिजली गिरने और तेज हवा के साथ एक घंटे में 44.2 मिलीमीटर बारिश हुई। शाम पांच से छह बजे तक जोरदार बारिश हुई। दोपहर की प्रचंड गर्मी के चलते तापमान 32 डिग्री को पार तो किया, मगर बारिश शुरू होते ही पारा सात डिग्री तक लुढ़ककर 25 डिग्री पर आ गया।
दोपहर तक धूप निकलने के चलते हवा में नमी 88 फीसदी तक पहुंची जिससे उमस ने हलकान करना शुरू कर दिया। शाम को पांच बजे अचानक से घने काले बादल मंडराने से अंधेरा सा छा गया। एकाएक तेज बारिश होने लगी।
पिंडरा में जर्जर भवन से प्लास्टर और पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े सड़क पर गिरे। गनीमत थी कि मकान में कोई नहीं था, लेकिन रास्ते से कई लोग गुजर रहे थे जो बाल-बाल बच गए। पिंडरा में मिराशाह-कठिराव मार्ग पर पुराना पेड़ गिरने से यातायात आधे घंटे तक बाधित रहा।
काशी में मंगलवार का अधिकतम तापमान सामान्य से 0.9 डिग्री ऊपर 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.3 डिग्री कम 24.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बही।
बारिश का आज ऑरेंज अलर्ट, 8 तक के विद्यालय बंद
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से बुधवार को वाराणसी सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जिले में हो रही वर्षा और मौसम के पूर्वानुमान के दृष्टिगत जिलाधिकारी की ओर से 19 अगस्त को कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है।
बीएसए की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। बीएसए ने बताया कि यह आदेश परिषदीय, मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त और अन्य बोडों से संचालित विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा। सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक को इसका पालन करने को कहा गया है।
वरुणा में पलट प्रवाह, बाढ़ का खतरा
गंगा के उफान से वरुणा में पलट प्रवाह शुरू हो गया है। 20 इलाकों में बाढ़ और पलायन का खतरा मंडराने लगा है। नदी का पानी पुराने पुल के पास सिंचाई विभाग के बांध के आसपास ही है। अब जलस्तर बढ़ा तो बांध के चैनल के ऊपर से पानी बहने लगेगा। ऐसी स्थिति में वरुणा के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। हुकुलगंज, बगवानाला, नक्खी घाट, शैलपुत्री, अमरपुर मढ़िया, सरैया और कोनिया समेत कई घनी आबादी वाले इलाकों में पानी भर सकता है। पिछले साल बड़े स्तर पर लोगों को रेस्क्यू कर शिविरों में रखा गया था।
जलभराव से लोगों को हुई परेशानी
वाराणसी शहर में बारिश के चलते मंगलवार को 19 इलाकों में जलभराव हुआ। गिरजाघर, गोदौलिया, काशी विश्वनाथ मंदिर मार्ग, नई सड़क, कैंट, महमूरगंज, सोनिया, सिद्धगिरीबाग, सिगरा, अंधरापुल, लहरतारा, मंडुवाडीह, चांदपुर, नदेसर, औरंगाबाद, विद्यापीठ, रेवड़ी तालाब, रवींद्रपुरी, अस्सी, नवाबगंज, भदैनी आदि क्षेत्रों में पानी लगा रहा। जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के कई वार्डों में पानी की निकासी की व्यवस्था चरमरा गई है। शहर की कई सड़कों की हालत बदहाल होने से लोग परेशान हैं। नालियों की स्थिति भी बुरी है।
चार किलोमीटर का दायरा रहा जाम, दो घंटे रेंगते रहे वाहन
बारिश के बाद मंगलवार को शहर की प्रमुख सड़कों पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई। कमच्छा से रथयात्रा, गुरुबाग होते हुए सिगरा और महमूरगंज से सिद्धगिरी बाग तक चार किलोमीटर के दायरे में वाहनों की लंबी कतार लग गई। राहगीरों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे तक लग गए। बारिश थमने के बाद सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति और गंभीर हो गई। कमच्छा और रथयात्रा क्षेत्र में वाहन काफी देर तक एक ही जगह फंसे रहे। गुरुबाग और सिगरा में भी मुख्य मार्ग पर यातायात की रफ्तार बेहद धीमी रही।




