बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाने और शहर को कैटल फ्री बनाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है।

cरेवाड़ी की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु एक बार फिर जानलेवा साबित हुए हैं। सेक्टर-4 निवासी पूर्व कैप्टन जगराम स्कूटी पर सब्जी लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क पर घूम रहे बेसहारा पशु ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में वह बेसुध होकर सड़क पर गिर गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है।
सड़कों पर पशु, जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई पर सवाल
हादसे के बाद शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या एक बार फिर गंभीर सवाल बनकर सामने आई है। शहर की गली-मोहल्लों की सड़कों से लेकर मुख्य सर्कुलर रोड तक बड़ी संख्या में बेसहारा पशु खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। इनके कारण आए दिन वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं।
हादसे के बाद शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या एक बार फिर गंभीर सवाल बनकर सामने आई है। शहर की गली-मोहल्लों की सड़कों से लेकर मुख्य सर्कुलर रोड तक बड़ी संख्या में बेसहारा पशु खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। इनके कारण आए दिन वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं।
लाखों खर्च के बाद भी परिणाम सिफर
बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाने और शहर को कैटल फ्री बनाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। रिकॉर्ड में रेवाड़ी कैटल फ्री शहर बताया जाता है, लेकिन सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में बेसहारा पशु घूमते दिखाई दे रहे हैं।
बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाने और शहर को कैटल फ्री बनाने के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। रिकॉर्ड में रेवाड़ी कैटल फ्री शहर बताया जाता है, लेकिन सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में बेसहारा पशु घूमते दिखाई दे रहे हैं।
पहले भी जा चुकी हैं कई लोगों की जान
बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले हादसों में अब तक करीब आधा दर्जन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। लगातार हादसों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ताजा घटना ने नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले हादसों में अब तक करीब आधा दर्जन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। लगातार हादसों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ताजा घटना ने नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Author: priya singh
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