18 साल बाद एक बार फिर नेपाल में हिंदू राष्ट्र का मुद्दा उठा है। पहाड़ से मधेश तक मांग गूंज रही है। इसकी बहस संसद तक पहुंच गई है। आरपीपी इसके समर्थन में है। सुनसरी हिंसा की भी जांच तेज कर दी गई है। समिति फायरिंग के तकनीकी पहलू खंगालेगी। आगे पढ़ें पूरी खबर…

नेपाल में करीब 18 साल बाद हिंदू राष्ट्र का मुद्दा एक बार फिर सड़क से सियासत के केंद्र तक पहुंच गया है। सुनसरी के देवानगंज में धार्मिक विवाद के बाद भड़के तनाव ने इसे नई धार दी है। काठमांडू से लेकर तराई और सीमावर्ती इलाकों तक हिंदू राष्ट्र की मांग उठ रही है। अब इसे केवल धार्मिक मांग नहीं, बल्कि नेपाल की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
कई संगठन भी हिंदू राष्ट्र के समर्थन में…
नेपाल का विश्व हिंदू परिषद और हिंदू स्वयंसेवक संघ समेत कई संगठन भी हिंदू राष्ट्र के समर्थन में हैं। विश्व हिंदू परिषद नेपाल की मातृशक्ति विभाग की अध्यक्ष कृष्णा पांडे के अनुसार, मई 2026 में सरकार को वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना समेत कई सुझाव दिए गए थे और काठमांडू में मंत्रालय स्तर पर बैठक हुई थी।
लंबे समय तक हिंदू राजशाही वाला देश रहा नेपाल
नेपाल 1768 से 2008 तक करीब 240 वर्ष हिंदू राजशाही वाला देश रहा। 2007 के अंतरिम संविधान में इसे धर्मनिरपेक्ष घोषित किया गया और 28 मई 2008 को राजशाही समाप्त कर गणतंत्र घोषित किया गया।
सुनसरी हिंसा में फायरिंग के तकनीकी पहलू खंगालेगी समिति
नेपाल के सुनसरी जिले के कप्तानगंज में 27 जुलाई को दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प की जांच अब फायरिंग के तकनीकी पहलुओं तक पहुंच गई है। गृह मंत्रालय के सहसचिव भूपेंद्र थापा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने घटनास्थल और घायलों से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। समिति हिंसा की वजह, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रशासनिक चूक के साथ गोली चलने की परिस्थितियों की भी जांच करेगी।
गोलीबारी के बैलिस्टिक और फोरेंसिक साक्ष्यों की पड़ताल के लिए पुलिस निरीक्षक दीपेश अवस्थी और पुलिस उपनिरीक्षक मोहनसिंह धामी को विशेषज्ञ के तौर पर समिति में शामिल किया गया है। जांच का अहम बिंदु यह है कि सुरक्षा बलों की फायरिंग निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी या नहीं। हिंसा में 24 वर्षीय ओमप्रकाश मेहता की मौत हुई थी, जबकि नौ नागरिकों समेत कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद प्रशासनिक बदलाव करते हुए ईश्वरी प्रसाद अर्याल को प्रमुख जिला अधिकारी बनाया गया है। नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस, नेपाली सेना और राष्ट्रीय जांच विभाग की निगरानी बढ़ाई गई है।
मानवाधिकार आयोग भी कर रहा मामले की जांच
उधर, सिरहा के गोलबजार में 30 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान 15 वर्षीय गणेश यादव की मौत की अलग जांच चल रही है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी सुनसरी मामले की जांच शुरू कर दी है। आयोग की टीम ने प्रशासन, पुलिस, अस्पताल और प्रभावित पक्षों से घटना की जानकारी जुटाई है। सरकार ने संवेदनशील जिलों में सुरक्षा के साथ संवाद और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने पर जोर दिया है। उधर कप्तानगंज में स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर है। राजमार्ग क्षेत्र से कर्फ्यू हटाया जा चुका है, हालांकि संवेदनशील इलाकों में निगरानी जारी है।



