यूपी के गाजियाबाद जिले से सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहां 10वीं की छात्रा को अगवा कर चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आरोपी नाबालिग को सात घंटे कार में घुमाते रहे। इसके बाद एनएच-9 पर फेंककर फरार हो गए। राहगीरों की मदद से अगले दिन पीड़िता घर पहुंची। शिकायत के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
10वीं कक्षा की छात्रा को गाजियाबाद के मसूरी थाने के पास से अगवा कर दो आरोपियों ने चलती कार में उसके साथ दुष्कर्म किया। किशोरी को कार में लेकर आरोपी करीब सात घंटे तक शहर की सड़कों पर घूमते रहे। देर रात उसे बदहवास हालत में एनएच-9 के किनारे फेंककर फरार हो गए। पीड़िता अगले दिन घर पहुंची।
पीड़िता ने पुलिस को बताया, आरोपियों ने विरोध करने पर उसे डराया और जान से मारने की धमकी दी। कार में वह चीखती रही और छोड़ने की गुहार लगाती रही, पर आरोपियों ने उसकी एक नहीं सुनी। । कार के शीशों पर सन शेड लगी हुई थी, जिससे बाहर से अंदर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
एसीपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कार नंबर व मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर दोनों आरोपियों को पिलखुवा से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने वारदात कबूल कर ली है। दोनों शादीशुदा हैं। वारदात के बाद दोनों घर जाकर आराम से सो गए। कार भी बरामद कर ली गई है।
पीड़िता की मां ने बताया कि उन्होंने बेटी को गोद लिया था। उन्होंने आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है।
सात घंटे, एक कार और मदद की आस में गुजरता हर पल। 27 जुलाई की रात दरिंदगी की शिकार हुई 10वीं की छात्रा को उम्मीद थी कि कहीं न कहीं पुलिस दिखेगी, कोई उसकी चीख सुन लेगा और कार रुकवा देगा। कार दो बार थाने के सामने से गुजरी भी, रास्ते में पुलिस चौकियां मिलीं और पुलिसकर्मी भी दिखे, लेकिन किसी ने उसकी बेबस चीखें नहीं सुनीं।
पिलखुवा की ओर जाते समय सड़क किनारे चीता बाइक पर पुलिसकर्मी भी दिखाई दिए। इस दौरान वह लगातार रोती-गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उसकी आवाज किसी तक नहीं पहुंच सकी। रास्ते में आरोपियों ने एक मेडिकल स्टोर पर कार रोकी और कुछ दवाएं खरीदीं।
पीड़ित मां का कहना है कि पुलिस को फार्म हाउस के गार्ड और मालिक से भी पूछताछ करनी चाहिए। उनका कहना है कि गार्ड ने गेट खोला था, इसलिए उसकी भूमिका की भी जांच जरूरी है। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आरोपी वहां किस मकसद से गए थे। हालांकि, सदमे में होने के कारण किशोरी फार्म हाउस की सही लोकेशन नहीं बता पा रही है।
पीड़िता की मां का आरोप है कि उन्होंने 28 जुलाई की दोपहर मसूरी थाने में शिकायत दी थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय कई सवाल पूछकर उन्हें टाल दिया। उनका कहना है कि एक अगस्त को यानी चार दिन बाद तब एफआईआर दर्ज की गई, जब उन्होंने पुलिस आयुक्त से शिकायत करने की बात कही।
हालांकि, एसीपी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी। शुरुआती जांच में कुछ विरोधाभासी तथ्य सामने आए थे, इसलिए सत्यापन के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई।
- रात में कार के शीशे पर सन शेड लगा देखकर भी पुलिस को अंदेशा क्यों नहीं हुआ।
- जब कार दो बार थाने के सामने से गुजरी तो वह पुलिस की नजर से कैसे बची?
- हाईवे और सर्विस रोड पर गश्त के दावों के बावजूद किसी ने कार को क्यों नहीं रोका?
- मेडिकल स्टोर और फार्म हाउस तक पहुंचने के दौरान किसी को शक क्यों नहीं हुआ?
- शिकायत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज करने और मेडिकल कराने में चार दिन की देरी क्यों हुई?
- फार्म हाउस और वहां मौजूद गार्ड की भूमिका की अब तक गहराई से जांच क्यों नहीं हुई?



