
हरियाणा कांग्रेस में पिछले सात वर्षों में छह प्रभारी बदले जा चुके हैं, लेकिन पार्टी के अंदर की खींचतान और गुटबाजी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हर बार नया प्रभारी आता है, नेताओं से मुलाकात करता है, मंथन का दौर चलता है और संगठन को मजबूत करने का दावा किया जाता है, मगर जमीनी स्तर पर इसका खास असर दिखाई नहीं देता। यही वजह है कि कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है और पार्टी के भीतर एकजुटता का सवाल लगातार बना हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरियाणा कांग्रेस में प्रभारी की भूमिका इसलिए भी सीमित रही क्योंकि पिछले वर्षों में जो प्रभारी नियुक्त किए गए, उनका राजनीतिक कद प्रदेश के बड़े नेताओं के बराबर या उनसे कम रहा। ऐसे में वह पार्टी के दिग्गज नेताओं के बीच संतुलन बनाने और उन्हें एक दिशा में लाने में सफल नहीं हो पाए। कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला जैसे बड़े नेताओं के अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र हैं। ऐसे में इन नेताओं को साथ लेकर चलने के लिए राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर नेता की जरूरत महसूस की जाती रही है।
संगठन की कमजोरी
दूसरी बड़ी समस्या संगठन की कमजोरी रही है। लंबे समय तक कांग्रेस के पास मजबूत जिला और बूथ स्तर का ढांचा नहीं रहा। प्रभारी और प्रदेश नेतृत्व की बातचीत अक्सर बड़े नेताओं तक ही सीमित रही, जबकि फैसलों और रणनीति को जमीन तक पहुंचाने के लिए मजबूत संगठन जरूरी होता है। जिला अध्यक्षों और स्थानीय पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका के बिना कोई भी राजनीतिक रणनीति प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाती।
सत्ता से बाहर रहने का असर भी पार्टी के संगठनात्मक प्रभाव पर पड़ा है। सरकार में नहीं होने के कारण प्रभारी के पास प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बनाने की क्षमता सीमित रहती है। ऐसे में बड़े नेताओं के बीच समन्वय बनाना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना और कठिन हो जाता है। कांग्रेस के सामने अब चुनौती केवल नया प्रभारी नियुक्त करने की नहीं, बल्कि ऐसा नेतृत्व और व्यवस्था तैयार करने की है जो बड़े नेताओं के बीच तालमेल स्थापित कर सके और जिला स्तर तक फैसलों को लागू करा सके।
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और जनहित के मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने पर जोर दिया।
संजय दत्त ने कहा कि कांग्रेस को बेरोजगारी, महंगाई, किसानों, कर्मचारियों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों से संवाद स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है और सभी कार्यकर्ताओं को एकजुटता, अनुशासन और समर्पण के साथ काम करना होगा। बैठक में पदाधिकारियों ने संगठन को लेकर सुझाव भी दिए, जिन्हें कार्ययोजना में शामिल करने का भरोसा संजय दत्त ने दिया। इसके बाद कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों ने भी प्रभारी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। संजय दत्त ने कर्मचारियों के मुद्दों को पार्टी स्तर पर उठाने का आश्वासन दिया।
सिरसा विधायक गोकुल सेतिया ने बैठक में हुए घटनाक्रम को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। सिरसा में मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने बिना नाम लिए भाजपा से कांग्रेस में आए नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पहले भाजपा में रहे, वे अब पुराने कांग्रेसियों को नसीहत दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान किसानों का विरोध करने वाले नेताओं को आज पार्टी में आगे जगह मिल रही है, जबकि संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलना चाहिए।
सेतिया ने प्रभारी के साथ हुई बैठक में सीट व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनकी और विधायक देवेंद्र हंस की सीट पीछे लगाई गई थी, इसलिए वे आगे जाकर बैठे। उन्होंने इसे निर्वाचित विधायकों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने 2014 में कांग्रेस छोड़ने का कारण भी तत्कालीन प्रदेश नेतृत्व को बताया। सेतिया ने हाईकमान को सलाह देते हुए कहा कि पहले अपने विधायकों को संभालना जरूरी है। उन्होंने कहा कि 37 विधायकों से घटकर पार्टी अब 32 पर आ गई है, ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों का मनोबल बढ़ाना होगा। सेतिया ने कहा कि पार्टी मंच पर संघर्ष करने वालों को आगे लाना होगा, तभी हरियाणा में कांग्रेस संगठन मजबूत हो सकेगा।
प्रभारी प्रयास कर रहे हैं, मगर ऐसा नहीं लगता है कि कुछ हो पाएगा। कांग्रेस के अंदर गुटबाजी काफी हावी हो चुकी है। बीते चुनाव में जनता ने कांग्रेस का भरपूर साथ दिया था। मगर गुटबाजी की वजह से ही कांग्रेस जीत के करीब पहुंचकर हार गई। कांग्रेस के अंदर यह बीमारी तभी खत्म हो पाएगी, जब हाईकमान कोई मजबूत फैसला लेगा। कांग्रेस के अंदर लोग सिर्फ कुर्सी के लिए बल्कि बैठने के लिए भी लड़ रहे हैं। सिरसा के विधायक का बयान आपने सुना ही होगा। – डा. आरआर मलिक, राजनीतिक विश्लेषण हरियाणा
Author: priya singh
The Voice behind the Mic. The Pen behind the Truth. 👑 🎙️ News Anchor | Digital Scribe 🖋️ Crafting perspectives, delivering facts, and documenting history in black & white. 🏛️ Where eloquence meets hard-hitting journalism. 👇 Read the untold stories below.