
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टर और भाजपा सांसद रवि किशन के पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक का आदेश दिया है। इस आदेश के तहत कई संस्थाओं को उनके नाम, तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य विशेषताओं का बिना इजाजत कमर्शियल इस्तेमाल करने से रोका गया है। इसमें एआई, डीपफेक टेक्नोलॉजी और अन्य डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल भी शामिल है।
एआई इस्तेमाल समेत रवि किशन की तरफ से लगाए गए ये आरोप
जस्टिस ज्योति सिंह की सिंगल-जज बेंच ने यह अंतरिम आदेश रवि किशन द्वारा दायर एक कमर्शियल केस में दिया। यह केस कई प्रतिवादियों के खिलाफ दायर किया गया था, जिनमें सोशल मीडिया अकाउंट्स, वेबसाइट्स, डोमेन नेम रजिस्ट्रार, मध्यस्थ और अज्ञात “जॉन डो” (John Doe) संस्थाएं शामिल हैं, जिन पर उनके व्यक्तित्व का बिना इजाजत इस्तेमाल करने का आरोप है।
कोर्ट ने आदेश में कही ये बात
अपने आदेश में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि रवि किशन एक जाने-माने एक्टर हैं, जिनका करियर तीन दशकों से ज्यादा लंबा रहा है। साथ ही एक जन प्रतिनिधि के तौर पर भी उन्हें पहचान मिली है और उनकी काफी अच्छी साख, प्रतिष्ठा और कमर्शियल वैल्यू है।
जस्टिस ज्योति सिंह ने नोट किया कि वादी ने कई भाषाओं में 750 से ज़्यादा फिल्मों में काम किया है और उनकी कमर्शियल पहचान उनके नाम, तस्वीर, शक्ल-सूरत, आवाज, खास डायलॉग और व्यक्तित्व की दूसरी खासियतों से गहराई से जुड़ी है। ये सब मिलकर उनके व्यक्तित्व और पब्लिसिटी से जुड़े अहम अधिकार बनाते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, ‘वादी ने एकतरफा अंतरिम रोक पाने के लिए शुरुआती तौर पर मजबूत मामला बनाया है। सुविधा का संतुलन वादी के पक्ष में है और अगर अंतरिम रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकेगी।’
कोर्ट ने यह भी कहा कि रवि किशन को अपने व्यक्तित्व की अलग-अलग खूबियों की सुरक्षा करने और दूसरों को उनकी साफ मंजूरी के बिना इनका इस्तेमाल करने या कमर्शियल फायदा उठाने से रोकने का पूरा अधिकार है।

कोर्ट ने बिना मंजूरी रवि किशन से जुड़ी चीजों के इस्तेमाल पर लगाई रोक
जस्टिस सिंह ने कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों को अब कानूनी मान्यता मिल चुकी है और उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, खासकर तब जब बिना मंजूरी के इस्तेमाल से कमर्शियल नुकसान हो, निजता का उल्लंघन हो या किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचे।
आदेश में कहा गया कि वादी को ऐसे किसी भी कंटेंट के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार है जो उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करता हो, या अश्लील/अभद्र हो, या जिसमें पोर्नोग्राफिक कंटेंट हो और जिससे जनता, परिवार और दोस्तों के बीच उनकी छवि, साख और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता हो।
उन्हें सुरक्षा पाने और गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने का भी अधिकार है। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों और उनकी ओर से काम करने वाले सभी लोगों को रवि किशन के नाम, तस्वीर, शक्ल-सूरत या उनकी पर्सनैलिटी से जुड़ी किसी भी पहचान वाली चीज़ का इस्तेमाल करने या उसका फायदा उठाने से रोक दिया है।
16 अक्तूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में होगी अगली सुनवाई
तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई का निर्देश देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने पहचाने गए प्रतिवादियों और डोमेन नेम रजिस्ट्रार को आदेश दिया कि वे आदेश की कॉपी मिलने के तीन दिनों के भीतर आदेश में बताए गए उल्लंघन करने वाले URL को हटा दें। कोर्ट ने इंटरमीडियरीज (जैसे मेटा, गूगल और X कॉर्प) को भी निर्देश दिया कि अगर संबंधित प्रतिवादी आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो शिकायतकर्ता द्वारा सूचित किए जाने पर वे 72 घंटों के भीतर पहचाने गए कंटेंट को हटा दें
यह मामला दलीलें पूरी करने के लिए 13 अगस्त को जॉइंट रजिस्ट्रार के सामने और आगे की सुनवाई के लिए 16 अक्तूबर को दिल्ली हाई कोर्ट के सामने लिस्ट किया गया है। रवि किशन का मामला उन हाई-प्रोफाइल हस्तियों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जो दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी अधिकारों का दावा कर रहे हैं।
Author: priya singh
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