अधिसूचना के तहत पंजाब सरकार और उसकी एजेंसियों के सभी संदर्भों को चंडीगढ़ प्रशासन के अनुरूप संशोधित किया गया है। अब राज्य और पंजाब की जगह केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ तथा राज्य सरकार का अर्थ चंडीगढ़ के प्रशासक से होगा।

गृह मंत्रालय के साथ चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद शहर के उद्योग एवं कारोबार जगत को नई दिशा मिली है। केंद्र सरकार ने कारोबार शुरू करने और निवेश को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट, 2020 को आवश्यक संशोधनों के साथ केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में लागू कर दिया है।
चंडीगढ़ के अनुरूप बदले गए कानून के सभी प्रावधान
अधिसूचना के तहत पंजाब सरकार और उसकी एजेंसियों के सभी संदर्भों को चंडीगढ़ प्रशासन के अनुरूप संशोधित किया गया है। अब राज्य और पंजाब की जगह केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ तथा राज्य सरकार का अर्थ चंडीगढ़ के प्रशासक से होगा। इसी प्रकार जिला नोडल एजेंसी की जगह चंडीगढ़ ब्यूरो ऑफ एंटरप्राइज एंड इन्वेस्टमेंट तथा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जगह चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति कार्य करेगी। सक्षम प्राधिकारी की परिभाषा का भी विस्तार किया गया है, जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन के विभाग, स्थानीय निकाय, वैधानिक बोर्ड, यूटी के स्वामित्व वाले निगम, शहरी विकास प्राधिकरण और अन्य स्वीकृति देने वाली एजेंसियां शामिल होंगी।
स्वीकृतियों का इंतजार किए बिना शुरू कर सकेंगे कारोबार
कानून के तहत पात्र उद्यम केवल घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) के आधार पर सिद्धांततः मंजूरी प्राप्त कर सकेंगे। इससे उन्हें सभी वैधानिक स्वीकृतियों का इंतजार किए बिना कारोबार शुरू करने की सुविधा मिलेगी। साथ ही संबंधित विभागों को तय समय-सीमा के भीतर आवेदन का निपटारा करना होगा।
डीम्ड अप्रूवल का भी प्रावधान
डीम्ड अप्रूवल का भी प्रावधान किया गया है। यदि कोई विभाग निर्धारित अवधि में आवेदन पर निर्णय नहीं लेता तो स्वीकृति स्वतः जारी मानी जाएगी और उसका विवरण सिंगल विंडो पोर्टल पर प्रदर्शित होगा। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। निवेशक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज जमा करना, आवेदन की स्थिति देखना, प्रमाणपत्र प्राप्त करना, निरीक्षण रिपोर्ट देखना और शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा जिन उद्योगों के पास वैध इन-प्रिंसिपल अप्रूवल होगा, उन्हें उसकी वैधता अवधि के दौरान नियमित निरीक्षणों से भी राहत मिलेगी। प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, समयबद्ध मंजूरियां मिलेंगी और चंडीगढ़ निवेश व कारोबार के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी और अनुकूल केंद्र के रूप में उभरेगा।
