सासनी तहसील में रजिस्ट्री निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन अधिवक्ताओं, कातिबों और स्टाम्प वेंडरों ने कामकाज ठप रखा

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Sunil Kumar

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सासनी तहसील में रजिस्ट्री प्रक्रिया के निजीकरण के सरकारी निर्णय के विरोध में मंगलवार को अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प वेंडरों और टाइपिस्टों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान सभी ने अपने चैंबर बंद रखे और कामकाज पूरी तरह ठप रखा। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुट होकर तहसील परिसर में नारेबाजी की। उनका कहना था कि यह निर्णय जनविरोधी है और इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। वकीलों और कातिबों ने बताया कि सरकार के इस कदम से न केवल तहसील के कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा, बल्कि आम जनता पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि निजीकरण से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी राजस्व को नुकसान होगा। अधिवक्ताओं ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह सरकारी तंत्र के अधीन रखने की मांग की।

कार्य बहिष्कार के कारण तहसील आने वाले दूर-दराज के फरियादियों को पूरे दिन भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रजिस्ट्री और दस्तावेजों से संबंधित आवश्यक कार्य न हो पाने के कारण कई लोग निराश होकर वापस लौट गए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस प्रदर्शन में महेन्द्र पाल सिंह, मधुकर नगाइच, कृष्ण सिंह, प्रशांत पाठक, संजीव सिंह, मधुसूदन चैधरी, राजेश शर्मा, महेश तोमर, सुभाष सिंह, गिर्राज सिंह, राजकुमार, अनिल गुप्ता, नितिन, ललित, मोहित दीपक और जीतेन्द्र सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

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Author: Sunil Kumar

SASNI, HATHRAS