UP: बांकेबिहारी के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं पर टूटी आफत, खून से सने लोग और चीखती महिलाएं; हादसे की तस्वीरें

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वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के पास एक पुराने मकान का जर्जर छज्जा अचानक गिरने से नौ श्रद्धालु घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई, जबकि दो घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

बांके बिहारी मंदिर के पास गिरा छज्जा, आधा दर्जन श्रद्धालु घायल; पुलिस ने  अस्पताल में कराया भर्ती - vrindavan banke bihari mandir slab collapsed six  devotees injured ...

वृंदावन में मंगलवार शाम छह बजे से जैसे ही मोबाइल फोन पर आंधी-बारिश का अलर्ट मैसेज आया तो मनीष गोस्वामी के घर बैठे अलीगढ़ के लक्ष्मीनारायण और उनके परिजन मौसम की बात ही कर रहे थे। तभी तेज आंधी शुरू हो गई और वह बाहर उठकर देखने चले गए। अचानक तेज आवाज आई और चीखपुकार मच गई। परिजन ने बाहर आकर देखा तो वह सड़क पर बेहोश पड़े हुए थे।

सिर से खून बह रहा था। परिजन उन्हें देखते ही रोने चिल्लाने लगे। मनीष गोस्वामी और उनके परिजन उन्हें हाथों में उठाकर लेकर दौड़ने लगे। तब तक एंबुलेंस आ चुकी थी, जिसकी सहायता से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। अलीगढ़ के कावेरी विहार के रहने वाले लक्ष्मीनारायण अपना जन्मदिन मनाने के लिए बांकेबिहारी मंदिर में अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ आए थे। मनीष गोस्वामी ने बताया कि वह दर्शन कर उनके घर पर बैठे थे लेकिन हाेनी उन्हें बाहर तक खींच ले गई। किसी को ऐसी उम्मीद भी नहीं थी कि ऐसा हादसा हो सकता है।

पिता संग बेटा भी हुआ घायल, चिपककर रोने लगा
आगरा के रुनकता निवासी विजय और पांच वर्ष का रुद्रांश भी हादसे में घायल हो गए। रुद्रांश के सिर में चोट आई। चोट लगने के बाद पिता ने अपनी चोट न देखकर बच्चे को उठाया और अपनी जेब से रुमाल निकालकर उसके सिर पर लगा दिया। बेटा दर्द के मारे रो रहा था और पिता की आंखों से आंसू निकल रहे थे। उनके साथ आए लोगाें ने दोनों को संभाला। हादसे के बाद बेटा पिता से चिपक गया। अस्पताल पहुंचने पर वह पिता के साथ व्हीलचेयर पर बैठा रहा। पिता ने अधिकारियों और चिकित्सकों से कहा कि मेरे बेेटे को कुछ नहीं होना चाहिए। आप पहले उसका इलाज कीजिए। प्राथमिक उपचार के परिजन दोनों को आगरा ले गए ।

आठ लोगों के साथ आईं चंचल और उसकी मां
राजस्थान के सवाई माधोपुर से चंचल प्रजापति और उसकी मां जानकी देवी आठ लोगों के साथ दर्शन करने को आईं थी। वृंदावन की परिक्रमा लगाने के बाद वह ठाकुरजी के दर्शन के लिए पहुंचे थे। हादसे में मां-बेटी घायल हो गए हैं। परिजन ने बताया कि दोनों की हालत खतरे से बाहर है।

संकरी गलियां और पुराने भवन बने चुनौती
वृंदावन की संकरी गलियां, वर्षों पुराने भवन और प्रतिदिन उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। विशेषकर त्योहार, सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में मंदिर क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी जर्जर भवन का हिस्सा टूटना बड़ी जनहानि का कारण बन सकता है। बरसात का मौसम नजदीक होने से भवनों की मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

जोखिम में जान 
वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के आसपास की गलियों में हर दिन हजारों श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। मंदिर क्षेत्र में कई भवन ऐसे हैं, जिनके छज्जे, दीवारें और बालकनी जर्जर हालत में हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहे हैं। नतीजा यह है कि हादसे दर हादसे होने के बाद भी हालात नहीं बदल रहे हैं।

मंगलवार को गली नंबर-5 में जर्जर छज्जा गिरने से श्रद्धालुओं के घायल होने की घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। इससे पहले अगस्त 2023 में भी मंदिर क्षेत्र में छज्जा गिरने से पांच श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। उस हादसे के बाद जर्जर भवनों की पहचान और कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे किए गए थे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम और संबंधित विभाग समय-समय पर भवन स्वामियों को नोटिस तो जारी करते हैं लेकिन उसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती। कई भवनों पर वर्षों पुराने नोटिस आज भी हैं जबकि उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही के बीच ये भवन किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। चूंकि बांकेबिहारी मंदिर की ओर जाने वाली अधिकांश गलियां बेहद संकरी हैं।

छुट्टियों, त्योहारों और सप्ताहांत पर यहां हजारों श्रद्धालु एक साथ पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी भवन का छोटा सा हिस्सा भी टूटकर गिर जाए तो बड़ी जनहानि हो जाती है। वर्ष 2023 की दुर्घटना के बाद प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र के पुराने भवनों का सर्वे कराया था। कई भवनों को खतरनाक श्रेणी में भी चिह्नित किया गया लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई फाइलों तक ही सीमित रह गई।

हादसे में घायलों के लिए मसीहा बनी पुलिस
मथुरा-गोवर्धन मार्ग पर सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल महिला और दो लोगों के लिए गोवर्धन पुलिस मसीहा बन गई। एंबुलेंस का इंतजार न करने हुए थाना प्रभारी ने अपनी सरकारी गाड़ी से तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया, जिसके कारण तीनों की जान बच सकी।

घटना मंगलवार सुबह मथुरा-गोवर्धन मार्ग स्थित मां संतोषी स्कूल के पास की है। अडींग निवासी भीम अपनी मौसेरी बहन सुंदरी और बहनोई जगदीश निवासी कुरका, भरतपुर (राजस्थान) के साथ गोवर्धन की दंडवती परिक्रमा लगाने के बाद बाइक से वापस गांव अडींग लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक सड़क किनारे खड़ी ईको कार से टकरा गई। हादसे में बाइक सवार तीनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

इसी दौरान वीआईपी काफिले के साथ गुजर रहे सीओ अनिल कुमार और थाना प्रभारी भगत सिंह गुर्जर की नजर घायलों पर पड़ी। थाना प्रभारी ने तत्काल तीनों घायलों को अपनी सरकारी गाड़ी में बैठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोवर्धन पहुंचाया, जहां उनका उपचार शुरू कराया गया। सीओ अनिल कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर उपचार मिलना जरूरी होता है। पुलिस का पहला दायित्व मानव जीवन की रक्षा करना है। इसलिए घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उनका उपचार शुरू कराया गया।

 

 

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Author: ILMA NEWSINDIA

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