पंजाब के 102 नगर निकायों के चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) 925 सीटें जीतने के साथ पहले नंबर पर रही है। 374 सीटों जीतकर कांग्रेस ने दूसरा नंबर हासिल किया है। शिअद ने 189 और भाजपा ने 167 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने 248 सीटों पर जीत दर्ज की है।

पंजाब निकाय चुनाव का परिणाम कई संदेश लेकर आया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि चुनावी ट्रेंड के मुताबिक इस बार भी निकाय चुनाव में पंजाब के सयाने मतदाताओं ने सत्तारूढ़ सरकार को ही जितवाकर विकास की पटरी पर डबल इंजन के साथ आगे बढ़ने का मौका दिया है।
उधर, नतीजों का दूसरा पक्ष यदि देखें तो इन छोटे चुनावों (वार्डों तक सीमित) में जनादेश का बड़ा संदेश भी सामने आया है जो इस बात का संकेत देता है कि इस बार विधानसभा चुनाव के रण में मुकाबला रोचक होगा।
भाजपा ने मजबूत की सियासी जमीन
भले ही चुनाव में सत्तारूढ़ आप को बढ़त मिली है मगर भाजपा ने भी अपनी सियासी जमीन को मजबूत किया है। भाजपा जो कि पंजाब में अपने जनाधार के लिए बरसों से जूझ रही है, उसका प्रदर्शन सधी हुई रणनीति का नतीजा कहा जा सकता है। साल 2021 के निकाय चुनाव में भाजपा 2215 में से 49 सीटों पर सिमट गई थी मगर इस बार निकाय की कुल 1977 सीटों में से भाजपा ने 167 सीटों पर जीत दर्ज की है।
कांग्रेस-शिअद का प्रदर्शन लचर
कांग्रेस का बिगड़ा गणित
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में 13 में से 7 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस इस बात का दावा कर रही थी कि उन्होंने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में आप की आंधी (117 में से 92 सीटों पर जीत) को रोक दिया है। आला नेता भी शहरी और ग्रामीण मतदाताओं पर पार्टी की पकड़ को मजबूत बता रहे थे मगर साल 2026 के निकाय चुनाव के नतीजों ने तस्वीर ही बदल दी। साल 2021 के निकाय चुनाव में 1432 सीटें जीतने वाली कांग्रेस अबकी बार 384 सीटों पर ही सिमट गई। कांग्रेस के इस हश्र का मुद्दा पार्टी हाईकमान में राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तक उठा, फिलहाल अब चिंतन होगा।
कमजोर दिखा बादल का दल
शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल अपने शिरोमणि अकाली दल को इस चुनाव में कुछ खास नहीं दिलवा पाए। साल 2021 में भी शिअद सत्ता से बाहर थी मगर फिर भी निकाय चुनाव में 284 सीटें जीती थी मगर इस बार 191 सीटों पर जीत मिली पाई है। आजाद प्रत्याशी भी साल 2021 में 364 सीटों पर जीते थे इस बार वे 251 सीटों पर सिमट गए हैं जबकि बसपा 5 सीटों से बढ़कर 7 सीटों पर पहुंची है। खैर, इन नतीजों पर मंथन के बाद सभी दल आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी-अपनी सियासी रणनीति को धार देने में जुटेंगे।