
हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी कर पूरे मामले में विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की अब तक की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए जांच की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
दलीलों पर गौर करने के बाद हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए हरियाणा सरकार, भारत सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किए। अदालत ने निर्देश दिया कि जांच की वर्तमान स्थिति, एसआईटी द्वारा अब तक की गई कार्रवाई, नोटिस जारी न करने के कारण और आगे की प्रस्तावित प्रक्रिया का पूरा ब्यौरा रिकॉर्ड पर पेश किया जाए।
दरअसल, दुष्यंत चौटाला ने अपने काफिले को रोककर हथियार दिखाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ जांच को हरियाणा पुलिस से हटाकर किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीआई अथवा चंडीगढ़ या पंजाब पुलिस को सौंपने की मांग की है।
याचिका के अनुसार 17 अप्रैल 2026 को हिसार में उनके काफिले को एक सफेद बोलेरो वाहन ने रोक लिया था। आरोप है कि सिविल ड्रेस में मौजूद कुछ पुलिस अधिकारियों, जिनमें इंस्पेक्टर पवन कुमार का नाम प्रमुख रूप से लिया गया है, जिसने हथियार लहराते हुए उन्हें और उनके सुरक्षाकर्मियों को धमकाया।
दुष्यंत चौटाला ने अदालत को बताया कि वह वाई-प्लस सुरक्षा श्रेणी के तहत संरक्षित हैं। इसके बावजूद इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों ने भी अलग-अलग शिकायतें देकर घटना की पुष्टि की है और जान से मारने की धमकी दिए जाने का उल्लेख किया है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि घटना के बाद निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय हरियाणा पुलिस ने उनके परिजनों और समर्थकों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दबाव बनाने का प्रयास किया। विशेष रूप से 7 अप्रैल की एक अन्य घटना के आधार पर दर्ज एफआईआर को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया गया है।
याचिका में कहा गया है कि गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज की गई, जिसके चलते उन्हें हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।