जांच एजेंसियों ने जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए ब्लास्ट को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ब्लास्ट से पहले मौके पर एक संदिग्ध युवक दिखा था जो होटल में रुका हुआ था। डिटेल में पढ़ें खबर…

5 मई की रात करीब 8 बजे बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर हुआ धमाका अब एक बड़े आतंकी षड्यंत्र के रूप में सामने आ रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि सफेद टीशर्ट पहने आतंकी ने इस वारदात को अंजाम दिया और विस्फोट के बाद वहां से फरार हो गया। हैरानी की बात यह है कि विस्फोटक स्थल से मात्र 10 कदम की दूरी पर पंजाब पुलिस का नाका लगा हुआ था, फिर भी हमलावर बड़े आराम से निकल गया। पुलिस को संदेह है कि इस वारदात को दो युवकों ने मिलकर अंजाम दिया है।
हाई-सिक्योरिटी जोन के बाहर चुनी लोकेशन
जांच एजेंसियों के अनुसार, हमलावरों ने हाई-सिक्योरिटी जोन के बाहर लोकेशन को सॉफ्ट टारगेट के तौर पर चुना, ताकि शक भी कम हो और सुरक्षा प्रतिष्ठान को संदेश भी दिया जा सके। इस हमले की सबसे अहम कड़ी डिलीवरी सिस्टम का इस्तेमाल है। एक डिलीवरी एजेंट अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी के तहत बीएसएफ मुख्यालय पार्सल देने पहुंचा था। सुरक्षा नियमों के चलते उसे स्कूटी बाहर खड़ी करनी पड़ी।
पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी खंगाले तो सामने आया कि बीएसएफ के पास स्थित शराब के ठेके से कुछ कदम की दूरी पर सफेद टीशर्ट पहने युवक गायब हो गया। वह पहले हाथ में लिफाफा लेकर आता है और स्कूटी के पास रखकर तेजी से पैदल निकल जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि आईईडी विस्फोट के लिए रिमोट का इस्तेमाल किया गया है। यह सटीक टाइमिंग बताती है कि हमलावर ने पहले से रेकी की थी।
होटल में ठहरा था युवक, ब्लास्ट के बाद से गायब
सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (सीएफएसएल) की जांच में पुष्टि हुई है कि धमाका इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) से किया गया था। विस्फोटक पदार्थ स्कूटी के पास रखा गया था। विस्फोट के बाद स्कूटी ने आग पकड़ ली। एजेंसियों के अनुसार, यह कोई साधारण विस्फोट नहीं था, बल्कि कम समय में ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार किया गया हाई-इम्पैक्ट डिवाइस था। इससे संकेत मिलता है कि इसमें प्रशिक्षित मॉड्यूल का हाथ हो सकता है।
विस्फोट के पीछे सीमा पार बैठे हैंडलरों का हाथ
खुफिया एजेंसियों का दावा है कि इस विस्फोट के पीछे सीमा पार बैठे हैंडलरों का हाथ है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे प्रतिबंधित संगठनों के साथ लोकल गैंगस्टरों के नेटवर्क के जरिए ऐसे हमले करवाने की रणनीति पहले भी सामने आ चुकी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जरिए ऑपरेशन को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और डिजिटल ट्रेल खंगाल रही हैं। जिस डिलीवरी एजेंट की स्कूटी में धमाका हुआ, उससे लगातार पूछताछ जारी है।