सेना के अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को करारा जवाब देने के बाद अब सेना हर चुनौती के लिए तैयार है। युद्धाभ्यास से लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और वीर नारियां भी देश सेवा में भागीदारी की इच्छा जता रही हैं।

ऑपरेशन सिंदूर को एक वर्ष पूरा होने के बाद पठानकोट में सेना के प्रति लोगों का भरोसा और हौसला पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है। सेना के युद्धाभ्यास और सक्रियता ने सीमावर्ती क्षेत्रों में नया आत्मविश्वास भरा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भविष्य में ऑपरेशन सिंदूर 0.2 होता है तो वे सेना का पूरा सहयोग करेंगे।
सेना ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए बॉर्डर के गांव-गांव पहुंचकर लोगों से तालमेल मजबूत करना शुरू किया है। जवान ग्रामीणों को दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और संदिग्ध हरकतों की तुरंत सूचना देने के लिए जागरूक कर रहे हैं। स्कूलों और गांवों में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन की कार्रवाई और भारतीय सेना के जवाब को दिखाया गया जिससे युवाओं में देशभक्ति का जोश बढ़ा है। हथियारों की प्रदर्शनी और युद्ध से जुड़ी वीडियोग्राफी ने युवा पीढ़ी को आकर्षित किया है और वे सेना व अन्य सुरक्षा एजेंसियों में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं।
सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस तक मजबूत सुरक्षा घेरा
सेना के अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को करारा जवाब देने के बाद अब सेना हर चुनौती के लिए तैयार है। युद्धाभ्यास से लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और वीर नारियां भी देश सेवा में भागीदारी की इच्छा जता रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील पठानकोट में सेना ने घुसपैठ रोकने के लिए कड़ा नेटवर्क तैयार किया है। वीडीसी सदस्यों के साथ तालमेल बढ़ाया गया है और सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस तक सेना, पुलिस और कमांडो तैनात हैं। इससे दुश्मन की हर चाल नाकाम करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।