
निलंबित विधायकों में से एक जरनैल सिंह ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए और इसे एकतरफा कार्रवाई करार दिया। विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि पार्टी ने उनके साथ ‘धक्का’ किया है। उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से उन्हें नोटिस भेजा गया था जिसका उन्होंने विधिवत जवाब भी दिया था। इसके बावजूद, उनकी बात सुने बिना ही उन्हें निलंबित कर दिया गया।
हाईकमान को चाहिए था कि वे हमें बुलाते और हमारा पक्ष सुनते। जिस पार्टी के प्रति मैं हमेशा वफादार रहा, उसने मुझे यह ‘इनाम’ दिया है। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए जरनैल सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि हुड्डा ने उन्हें उनकी वफादारी का यह सिला दिया है। जरनैल सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने बीते 20 वर्षों से रतिया में खून-पसीना एक करके कांग्रेस को मजबूत किया है और आज पार्टी को ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
विधायक ने अपनी ताकत का एहसास करवाते हुए कहा कि रतिया के 87 हजार मतदाताओं ने उन्हें चुनकर विधानसभा भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अभी भी खुद को कांग्रेस का सिपाही मानते हैं।अगर उन्हें सस्पेंड करने का आधिकारिक पत्र मिलता है, तो वे सीधे अपने समर्थकों और क्षेत्र की जनता के बीच जाएंगे। जनता और समर्थकों से राय-मशवरा करने के बाद ही वे अपनी अगली राजनीतिक रणनीति तय करेंगे। जरनैल सिंह ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर पार्टी हाईकमान से भी मुलाकात करेंगे। फिलहाल, रतिया विधायक के तेवरों से साफ है कि आने वाले दिनों में हरियाणा कांग्रेस के भीतर की अंतर्कलह और गहरा सकती है।