मथुरा नाव हादसा: ऋषभ शर्मा का शेरपुरा रोड पर अंतिम संस्कार, छोटे भाई ने दी अंतिम विदाई; जगरांव में पसरा मातम

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मथुरा में नाव हादसे में जगरांव के 6 लोगों की मौत हुई है। जगरांव से वृंदावन की ओर निकली भक्ति यात्रा किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतनी दर्दनाक याद बन जाएगी ।

Mathura Boat Tragedy Rishabh Sharma Last Rites Performed on Sherpura Road

वृंदावन में हुए दर्दनाक नाव हादसे में जान गंवाने वाले ऋषभ शर्मा का आज शेरपुरा रोड पर अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई ने बड़े भाई को अंतिम विदाई दी।

मथुरा में नाव हादसे में जगरांव के 6 लोगों की मौत हुई है। जगरांव से वृंदावन की ओर निकली भक्ति यात्रा किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतनी दर्दनाक याद बन जाएगी । जिन श्रद्धालुओं के होंठों पर “राधे-राधे” का नाम था, जिनकी आंखों में बांके बिहारी के दर्शन की आस थी, वही श्रद्धालु कुछ ही घंटों में मौत की लहरों में समा गए। वृंदावन में यमुना नदी में हुए नाव हादसे ने पंजाब के जगरांव शहर को गहरे सदमे में डाल दिया। इस हादसे में 13 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जिनमें उस क्लब के संस्थापकों में से एक भाई भी शामिल था, जिसने लोगों को भक्ति के रास्ते से जोड़ने का सपना देखा था।

बांके बिहारी क्लब से जुड़ी कहानी

यह पूरी कहानी जगरांव के बांके बिहारी क्लब से जुड़ी है, जो करीब 9 साल पहले तीन युवकों ने मिलकर बनाया था।

मंदिरों के संकीर्तन से शुरू हुई कहानी जगरांव के रहने वाले यशु बजाज और लवी बहल ने करीब 16-17 साल की उम्र में मंदिरों में संकीर्तन करना शुरू किया था। उस समय उनके पास न कोई बड़ा मंच था और न ही कोई संस्था, सिर्फ भक्ति का जज़्बा था।

धीरे-धीरे उनके साथ लवी बहल का भाई मधुर बहल भी जुड़ गया। तीनों ने मिलकर मंदिरों के साथ-साथ लोगों के घरों में भी संकीर्तन करना शुरू कर दिया। यशु और लवी भजन गाते थे, जबकि उनके साथ 5-6 साथी वाद्य यंत्र बजाकर मंडली को पूरा करते थे। भक्ति की इस छोटी-सी शुरुआत ने धीरे-धीरे पूरे इलाके में पहचान बना ली।

9 साल पहले बना “बांके बिहारी क्लब”

करीब 9 साल पहले तीनों दोस्तों ने मिलकर “बांके बिहारी क्लब” बनाया। इस क्लब का कोई औपचारिक रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया गया था, क्योंकि इसे व्यवसाय नहीं बल्कि भक्ति सेवा के रूप में चलाया जा रहा था। क्लब के सदस्य घर-घर जाकर संकीर्तन करते और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते। जो भी व्यक्ति इन संकीर्तनों में आता, वह धीरे-धीरे इस मंडली से जुड़ता चला जाता। सोशल मीडिया के जरिए भी इस मंडली का प्रचार हुआ और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई।

पांच साल पहले शुरू हुई वृंदावन यात्रा

करीब पांच साल पहले क्लब ने श्रद्धालुओं को वृंदावन की धार्मिक यात्रा करवानी शुरू की। हर साल जगरांव और आसपास के लोग इनके साथ भक्ति यात्रा पर जाते थे। यात्रा का पूरा खर्च श्रद्धालुओं से लिया जाता था और उसी से बसों का किराया रास्ते में भोजन वृंदावन में होटल या धर्मशाला में ठहरने की व्यवस्था चार दिनों का खाना-पीना सब कुछ क्लब की तरफ से कराया जाता था। इस बार 130 श्रद्धालु गए थे यात्रा पर इस साल 9 अप्रैल को जगरांव से दो बसों में 130 श्रद्धालु वृंदावन के लिए रवाना हुए।

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Author: Farheen