जी-13 बाइसिकल फोरम के प्रधान राजिंदर जिंदल एवं महासचिव रोहित पाहवा ने कहा कि मौजूदा हालात में बिना कीमत बढ़ाए उद्योग का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से साइकिलों के दाम सेगमेंट के अनुसार बढ़ाने का निर्णय लिया।

कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमतों ने साइकिल उद्योग पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। इसी के चलते जी-13 बाइसिकल फोरम की आपात बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से साइकिलों के दाम बढ़ाने का फैसला लिया है।
फोरम से जुड़े साइकिल निर्माताओं ने कच्चे माल की तेजी से बढ़ती कीमतों पर गहरी चिंता जताई है। स्टील, प्लास्टिक, टायर-ट्यूब, ब्रास और निकेल जैसी आवश्यक इनपुट सामग्री की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है जिससे उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। फोरम के प्रधान राजिंदर जिंदल एवं महासचिव रोहित पाहवा ने कहा कि मौजूदा हालात में बिना कीमत बढ़ाए उद्योग का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से साइकिलों के दाम सेगमेंट के अनुसार बढ़ाने का निर्णय लिया।
इस प्रकार बढ़ाए दाम
नई दरों के अनुसार स्टैंडर्ड साइकिलों की कीमत में 235 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं एमटीबी और लेडीज साइकिलों के दाम 260 रुपये तक बढ़ाए गए हैं। बच्चों की साइकिलों पर 225 रुपये और मल्टीस्पीड साइकिलों पर 350 रुपये तक की बढ़ोतरी लागू की गई है। यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू माना जाएगा।
राजिंदर जिंदल ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल ने उद्योग की लागत संरचना को पूरी तरह प्रभावित किया है। यदि समय रहते कीमतों में समायोजन नहीं किया जाता, तो उत्पादन और सप्लाई दोनों पर असर पड़ सकता है। महासचिव रोहित पाहवा ने बताया कि यह निर्णय उद्योग के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए लिया गया है और इसका उद्देश्य केवल बढ़ी हुई लागत की आंशिक भरपाई करना है। कोऑर्डिनेटर उमेश कुमार नारंग ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी।
15 को करेंगे स्थिति की समीक्षा
साइकिल निर्माताओं ने यह भी तय किया है कि 15 अप्रैल को एक बार फिर स्थिति की समीक्षा की जाएगी। यदि कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहता है, तो प्रति साइकिल 100 रुपये तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी भी की जा सकती है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनपुट लागत पर नियंत्रण नहीं हुआ तो इसका असर आने वाले समय में बाजार की मांग और उपभोक्ताओं की जेब दोनों पर पड़ सकता है।