Haryana: राखीगढ़ी की साइट-7 पर खोदाई में एक और कंकाल मिला, मिट्टी से सुरक्षित निकालने में लगेंगे 10-15 दिन

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साइट नंबर -7 राखीगढ़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां अब तक 60 से अधिक मानव कंकाल मिल चुके हैं जिससे इस स्थल को प्राचीन कब्रिस्तान स्थल के रूप में पहचाना गया है।
Another skeleton discovered during excavation at Rakhigarhi Site-7

हड़प्पाकालीन पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी की साइट नंबर-7 पर खोदाई के दौरान एक और मानव कंकाल का ऊपरी हिस्सा मिला है। इसी साइट पर चार दिन पहले भी एक कंकाल मिला था। दोनों कंकालों को सुरक्षित बाहर निकालने में 10 से 15 दिन लग सकते हैं। मौसम में लगातार बदलाव के कारण खोदाई कार्य में बाधा भी आ रही है।

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की देखरेख में चल रही खोदाई के दौरान मिट्टी को चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से हटाया जा रहा है ताकि यहां मिल रहे अवशेषों को कोई नुकसान न पहुंचे। विभाग की तकनीकी टीम अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से इन कंकालों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालेगी। खोदाई की पूरी प्रक्रिया की वीडियो और फोटोग्राफी भी कराई जा रही है।

साइट नंबर -7 राखीगढ़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां अब तक 60 से अधिक मानव कंकाल मिल चुके हैं जिससे इस स्थल को प्राचीन कब्रिस्तान स्थल के रूप में पहचाना गया है। दो कंकालों का एक ही स्थान पर मिलना हड़प्पाकाल में मानव के अंतिम संस्कार की परंपराओं के प्रचलन का संकेत देता है। कंकालों के अध्ययन से उस दौर के सामाजिक ढांचे, रीति-रिवाजों और मानव जीवन से जुड़े कई अहम पहलुओं की जानकारी मिल सकेगी। संवाद

बारिश की वजह से धीमा चल रहा काम
खोदाई के दौरान मौसम भी चुनौती बन रहा है। पिछले एक सप्ताह से रुक-रुककर बारिश से खोदाई कार्य बाधित रहा है। मिट्टी में नमी होने के कारण खोदाई में लगी टीम पूरी सतर्कता के साथ कार्य को आगे बढ़ रही है। साइट 7 से कंकालों को निकालने के बाद उनका वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा। उम्र, लिंग, स्वास्थ्य और मृत्यु के संभावित कारणों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके साथ ही डीएनए और अन्य जैविक परीक्षण से उस समय के लोगों की जीवनशैली और आनुवंशिक विशेषताओं पर जानकारी जुटाई जाएगी।

अधिकारी के अनुसार
राखीगढ़ की साइट नंबर सात पर खोदाई चल रही है और पुरातात्विक महत्व की कई चीजें मिल रही हैं जो शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। खोदाई में जो भी सामग्री मिल रही है उनका बारीकी से अध्ययन भी किया जा रहा है। – मनोज सक्सेना, अधीक्षण पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा, ग्रेटर नोएडा। 

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Author: priya singh

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