आम आदमी पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र में योजनाओं की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन पंजाब की महिलाओं के चरित्र और उनके आत्मसम्मान पर चोट करना किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना’ का आगाज किया है। इस योजना के तहत 18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपये (एससी महिलाओं को 1,500 रुपये) की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर कुछ महिलाओं का खुशी मनाने का वीडियो सामने आया। दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब की महिलाओं का अपमान करते हुए लिखा कि “1000-1500 मिलने पर गिद्दा करने वाली औरतें कहां पैदा कर लेंगी सूरमे?”
खैरा के इस बयान पर आप की महिला विधायकों ने आपत्ति जताई है। कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि खैरा को 1000 रुपये की कीमत नहीं पता क्योंकि उनकी जेबें पहले से भरी है। लेकिन उस बुजुर्ग मां से पूछिए जिसे दवा के लिए भी बेटों का मुंह देखना पड़ता था। आपने ऐसा बयान देकर अपनी छोटी सोच का सबूत दिया है।
आम आदमी पार्टी ने कहा कि हर कोई चांदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ है। किसी के लिए एक हजार रुपये छोटी रकम हो सकती है, लेकिन एक गरीब मां के लिए यह उसकी ‘इज्जत’ की रोटी है। खैरा ने पंजाब की उन माताओं की कोख का अपमान किया है जिन्होंने देश के लिए ‘सूरमे’ पैदा किए है। मदद लेने वाली महिलाओं को ऐसा कहना उनकी सामंती मानसिकता को दर्शाता है।
आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कहा है कि पंजाब की महिलाओं को इस तरह अपमानित करने की कोई ज़रूरत नहीं थी और न ही ऐसी बयानबाजी लोकतंत्र में शोभा देती है। आज एक तरफ आम आदमी पार्टी की सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिन-रात काम कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ विपक्षी नेता अपनी बौखलाहट में महिलाओं का अपमान करने पर उतर आए है। जो सरासर गलत है और राजनीती करने का बेहद गलत तरीका भी है।