Kanpur News: कॉमर्शियल गैस पर रोक से कानपुर के होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में हड़कंप मचा है। 50 करोड़ रुपये के दैनिक कारोबार को बचाने के लिए व्यापारी अब असुरक्षित डीजल भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं।

सरकार की ओर से कॉमर्शियल सिलिंडरों पर रोक लगाए जाने के बाद होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई और गेस्ट हाउस संचालकों में खलबली मच गई है। सहालगी सीजन और ईद को देखते हुए मंगलवार को कारोबारी दिन भर गैस के अन्य विकल्पों पर तैयारी करते रहे। डीजल भट्ठी, कोयले की भट्ठी आदि तैयार करवाने में लगे रहे। शहर में प्रतिदिन 50 करोड़ का खानपान का व्यापार है। कारोबारियों का कहना है कि ज्यादा संकट बढ़ा तो मिठाई, रेस्टोरेंट, होटल और ढाबों बंदी में हो सकती है।
मुंबई और बंगलूरू में होटल बंद किए जा चुके हैं। शहर भर में पांच हजार से ज्यादा रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानें हैं। 200 होटल और 1500 गेस्ट हाउस भी संचालित होते हैं। सरकार के नए फरमान से होटल, रेस्टोरेंट संचालक परेशान हो गए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा समय में सभी बड़े होटलों, रेस्टारेंटों में आधुनिक किचन बने हुए हैं। नई व्यवस्था में कोयले की भट्ठी, ओवन आदि का इस्तेमाल करना पड़ेगा। सहालगी सीजन में इतनी बड़ी आफत आ गई है।
ज्यादातर में आधुनिक किचन बन चुके हैं
कानपुर होटल, गेस्ट हाउस, स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के महामंत्री राजकुमार भगतानी ने बताया कि 19 मार्च से नवरात्र हैं और शादी समारोह शुरू हो जाएंगे। मार्च में ही शहर में बंपर शादियां हैं। अप्रैल और मई में तगड़ी सहालग है। अप्रैल में ही अक्षय तृतीया पड़ेगी। इस दिन हजारों की संख्या में शादियां होती हैं। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा समस्या बड़े होटलों और रेस्टोरेंटों में आएगी। ज्यादातर में आधुनिक किचन बन चुके हैं। सरकार ने अचानक फैसला लिया। इसका बहुत अधिक भंडारण भी नहीं किया गया था।
कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है कि गैस का विकल्प क्या लेकर आएं। इमरती, जलेबी बनाने में गैस सबसे अच्छा विकल्प है। डीजल भट्ठी में इसे बनाना जोखिम भरा हो सकता है। मिठाई, नमकीन कारोबारियों के सामने बड़ा संकट हो गया है।
सरकार की ओर से कॉमर्शियल सिलिंडरों पर रोक लगा दी गई है। आगे कैसे काम चलेगा। अब यही सवाल सामने खड़ा हो गया है। कोयला, डीजल और इलेक्टि्रक भट्ठी बनवाने के ऑर्डर दिए हैं।
हमारी मजबूत सरकार है लेकिन ऐसे फैसले की उम्मीद हम सरकार से नहीं करते हैं। कम से कम हमें दो सप्ताह का समय तो देना चाहिए था जिससे हम अपनी कोई व्यवस्था कर पाते। न तो हमारे पास कोयला है और न ही बिजली। ऐसे में हम होटल और रेस्टोरेंट संचालक कहां जाएं जबकि सबसे ज्यादा राजस्व देने वाली हमारी इंडस्ट्री है। सरकार से मांग है कि इस फैसले को वापस लेकर हमें कुछ दिनों का समय दें।