
सीआरपीएफ में कमांडेंट एवं रोहतक के सबसे बड़े गांव मोखरा के बेटे अजय मलिक ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पश्चिमी बंगाल के जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ सफलतापूर्वक अभियान चलाया।
आईईडी विस्फोट में घायल होने के बावजूद जवानों का नेतृत्व करते हुए वे मोर्चा पर डटे रहे। उन्हें दिल्ली के एम्स में दाखिल कराया गया है। सीआरपीएफ ने सूचना पाकर पश्चिमी बंगाल के सिंहभूम जिले के सारंडा स्थित मरांग पोंगा वन क्षेत्र में नक्सलियों को घेर लिया। तड़के पांच बजे मुठभेड़ शुरू हो गई।
झारखंड में कई बड़े नक्सली कमांडरों के विरुद्ध अभियानों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पूर्व की मुठभेड़ों में दो बार घायल होने के बावजूद वे हर बार और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ ड्यूटी पर लौटे। उनकी पत्नी पूजा मलिक भी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में सहायक कमांडेंट हैं। दोनों का जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित है। सारंडा के जंगलों में दिखाई गई उनकी वीरता ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो संकट की घड़ी में सबसे आगे खड़ा हो।