Karnal News: लंबे समय बाद बंद कमरे से निकाले गए डाॅक्टर छह दिन में छोड़ गए दुनिया

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अपना आशियाना की टीम ने डाॅक्टर हरनेल को अस्पताल में कराया था भर्ती, ऑस्ट्रेलिया रह रहे पत्नी और बेटियों को दी सूचना

माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। लंबे समय बाद बंद कमरे से निकाले गए डाॅक्टर हरनेल उर्फ हरकृष्ण सिंह छह दिन में दुनिया छोड़ गए। जीवन भर लोगों का निःशुल्क इलाज करने वाले होम्योपैथी डॉक्टर हरनेल ने अपनी सेवा करने का किसी को सप्ताह भर का भी समय नहीं दिया। वीरवार की रात 9:18 बजे उन्होंने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। शाम को तबियत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। अपना आशियाना की टीम ने उनके शव को शवगृह में रखवा दिया है।
वहीं ऑस्ट्रेलिया में रह रहीं उनकी पत्नी और दो बेटियों की पिता की मौत की सूचना दे दी है। आश्रम के सेवादार राजकुमार अरोड़ा ने बताया कि यदि परिवार भारत आने की सहमति देगा तो उनके शव को रखा जाएगा, नहीं तो हिंदू रीति के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।
मीरा घाटी स्थित उनके बंद मकान से दयनीय हालत में अपना आशियाना आश्रम की टीम ने उन्हें गत सप्ताह रेस्क्यू किया था। तब से अब तक उनकी देखभाल करते हुए आश्रम की टीम ने उन्हें स्नान कराया और स्वस्थ करने के प्रयास किए। सेवादार अनु मदान और अंशुल ने बताया कि वीरवार को शाम साढ़े सात बजे उनकी तबियत ज्यादा खराब होने पर मेडिकल कॉलेज लाए थे।

गंदगी भरे डॉ. के मकान से छह लोगों ने निकाला था बाहर
अपना आशियाना आश्रम की टीम ने मीरा घाटी क्षेत्र में रह रहे होम्योपैथिक डॉ. को उनके मकान से रेस्क्यू किया था। सेवादार राजकुमार और अनु मदान ने बताया कि डॉ. दयनीय हालत में थे। लोगों के रोग हरने वाले मीरा घाटी क्षेत्र के रहने वाले डॉक्टर वर्षों से खाट पर थे, मल-मूत्र से लिपटे उनके बदन पर कीड़े भी चल रहे थे। जैसे ही उनके पुराने जर्जर मकान का दरवाजा खुला तो गली में भी बदबू आने लगी। घर पर किताबों और सामान के ढेर लगे हुए थे, जिससे कमरा भी गुफा की तरह बन गया था। छह लोगों की मदद से इन्हें बाहर निकाला गया। अब 6 दिन से वे आश्रम में आने के बाद ठीक महसूस कर रहे थे।

हॉकी चैंपियन थे पिता
बातचीत में दो दिन पहले डॉ. हरनेल ने बताया था कि वे करीब डेढ़ माह पहले लघु शंका करने के लिए उठे थे, चक्कर आने के बाद वे मुंह के बल गिर गए। इससे उन्हें चोटें लग गई और वे दोबारा उठ नहीं पाए। जैसे तैसे खाट पर गए और फिर उनसे उठा नहीं गया। इसी कारण उनका मल-मूत्र भी बिस्तर पर ही हुआ। उनके पिता राम मोहन सिंह हरियाणा में हॉकी चैंपियन भी रहे हैं।

50 साल तक दीं निःशुल्क सेवा
50 साल तक डॉ. ने मंदिर और गुरुद्वारों सहित अन्य डिस्पेंसरियों में नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं देकर लोगों की गंभीर बीमारियों का इलाज किया। वे खुद एसडी हाई स्कूल मुलतान और करनाल के दयाल सिंह कॉलेज में पढ़े। स्वभाव न मिलने के कारण कई वर्ष पहले उनकी पत्नी और दो बेटियां उन्हें छोड़कर ऑस्ट्रेलिया चली गई थीं।

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Author: admln