श्री हरमंदिर साहिब के पूर्व हजूरी रागी भाई बलदेव सिंह वडाला ने कहा कि एसजीपीसी हर समय अकाली दल को राजनीतिक संकट से बचाने में लगी रहती है, जिससे गुरुद्वारों के प्रबंधों में गिरावट आई है। अंदरूनी अनियमितताएं भी बढ़ी हैं।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर अकाली दल के राजनीतिक हित साधने के आरोप लगाते हुए श्री हरमंदिर साहिब के पूर्व हजूरी रागी भाई बलदेव सिंह वडाला ने तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि एसजीपीसी हर समय अकाली दल को राजनीतिक संकट से बचाने में लगी रहती है, जिससे गुरुद्वारों के प्रबंधों में गिरावट आई है। अंदरूनी अनियमितताएं भी बढ़ी हैं। भाई वडाला ने कहा कि यदि कमेटी के पदाधिकारी राजनीति से दूरी बनाकर गुरुद्वारा प्रबंधन पर ध्यान दें तो घोटालों और विवादों की नौबत ही न आए।
उन्होंने आरोप लगाया कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज का उपयोग भी एसजीपीसी, ज्ञानी रघबीर सिंह के खिलाफ कर सकती है क्योंकि हालिया बयानों ने अकाली दल और कमेटी के लिए नया पंथक व राजनीतिक संकट खड़ा किया है।
उन्होंने एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी द्वारा 72 घंटे में जवाब मांगने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांच वर्षों में कमेटी 328 पवित्र स्वरूपों का स्पष्ट हिसाब नहीं दे पाई। 319 हस्तलिखित स्वरूपों, 12,67,478 में से 886 स्वरूपों और बिना अनुमति छपे पवित्र अंशों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं की गई।
गोलक चोरी पर मांगा जवाब
भाई वडाला ने गोलक चोरी, जमीन घोटाले, लंगर धोखाधड़ी, मीरी-पीरी कृपाण की मूठ और आलमगीर के सोने के कलश जैसे मामलों का जिक्र करते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने कोहली सीए द्वारा रिकवर किए जाने वाले नौ करोड़ रुपये और श्री आनंदपुर साहिब में दो करोड़ सत्तर लाख रुपये के मकान के मामले पर भी जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि केवल 72 घंटे का नोटिस देकर जवाबदेही तय नहीं की जा सकती। ईमानदार व्यक्ति अन्याय होने पर स्वयं पद छोड़ देता है। भाई वडाला के आरोपों के बाद पंथक व सियासी हलकों में चर्चा तेज है, हालांकि एसजीपीसी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।