ऑटोमोबाइल से बासमती तक वैश्विक बाजार में हरियाणा की दमदार मौजूदगी दर्ज हुई है। नीति आयोग की 2023-24 की रिपोर्ट में निर्यात करने वाले शीर्ष राज्यों हरियाणा शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा कृषि से आगे बढ़कर एक मजबूत औद्योगिक और निर्यात केंद्र बन चुका है। ऑटोमोबाइल, चावल, टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में उसकी पकड़ मजबूत है।
नीति आयोग की 2023-24 की रिपोर्ट में हरियाणा ने खुद को देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में मजबूती से स्थापित किया है। राज्य न केवल पारंपरिक कृषि उत्पादों में आगे है बल्कि ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 1.48 लाख करोड़ रुपये रहा है। राज्य का समग्र स्कोर 55.01 रहा और रैंकिंग में हरियाणा शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका 23.35 फीसदी निर्यात के साथ हरियाणा का सबसे बड़ा बाजार है।
रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा कृषि से आगे बढ़कर एक मजबूत औद्योगिक और निर्यात केंद्र बन चुका है। ऑटोमोबाइल, चावल, टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में उसकी पकड़ मजबूत है। साथ ही नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
राज्य के निर्यात की सबसे बड़ी ताकत ऑटोमोबाइल सेक्टर है। देश के 60 फीसदी से अधिक यात्री वाहनों का उत्पादन हरियाणा में होता है। गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी वाहन कंपनियों के कारखाने हैं। मोटर कार, मोटर वाहन के पुर्जे, मोटरसाइकिल और साइकिल राज्य के प्रमुख निर्यात उत्पाद हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हरियाणा पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाश रहा है। टर्बो जेट और एयरोस्पेस से जुड़े उपकरणों का निर्यात राज्य की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है। रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्र आने वाले समय में निर्यात को और बढ़ा सकते हैं।
हरियाणा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2023-24 में लगभग 10.9 लाख करोड़ रुपये रहा और इसमें लगभग 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। कृषि अब भी राज्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और लगभग 15 फीसदी योगदान देती है। लेकिन अब उद्योग और सेवा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
राज्य सरकार ने 2020 में निर्यात प्रोत्साहन नीति लागू की थी। इसका लक्ष्य 2025 तक निर्यात को 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इसके तहत औद्योगिक पार्क, निर्यात सुविधा केंद्र, लॉजिस्टिक सहायता और बाजार विकास योजनाएं शुरू की गईं। 2024 तक राज्य का निर्यात 1.5 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है।
रिपोर्ट में कुछ कमियां भी सामने आई हैं। ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का कम उपयोग, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कुछ क्षेत्रों में सीमित विविधीकरण जैसी चुनौतियां हैं। अगर इन क्षेत्रों में सुधार होता है तो हरियाणा और बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
ऑटोमोबाइल – गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद, सोनीपत
चावल- करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल
टेक्सटाइल – पानीपत
इंजीनियरिंग व स्टील- हिसार, फरीदाबाद
| देश | प्रतिशत (%) |
|---|---|
| संयुक्त राज्य अमेरिका | 23.35 |
| सऊदी अरब | 6.62 |
| संयुक्त अरब अमीरात | 6.45 |
| यूनाइटेड किंगडम | 4.72 |
| इराक | 4.09 |