CCTV में कैद हुआ मौत का मंजर: कोटपूतली-बहरोड़ में 100 साल पुराने मकान का छज्जा गिरा, लैब टेक्नीशियन की मौत

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Three of family die as portion of old apartment collapses in Cuttack

बहरोड़ कस्बे में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। खटीकों के मोहल्ले में करीब 100 साल पुराने जर्जर मकान का छज्जा अचानक टूटकर चलती बाइक पर गिर गया। हादसे में 32 वर्षीय लैब टेक्नीशियन रतनलाल प्रजापत की मौत हो गई, जबकि उनके 10 वर्षीय जुड़वा बच्चे हिमांशी और हिमांशु गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसा उस वक्त हुआ जब रतनलाल सुबह करीब 8 बजे अपने दोनों बच्चों को गुरुकुल स्कूल छोड़ने के लिए नारनौल रोड की ओर बाइक से जा रहे थे। रतनलाल मूल रूप से नीमराना के गांव कोलीला के निवासी थे और फिलहाल बहरोड़ में अपने ससुराल में पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे थे। वे एक निजी अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थे।

पड़ोसियों जयसिंह और दीपक लखेरा के अनुसार रतनलाल घर से महज 10 मीटर आगे ही बढ़े थे कि दयाराम बसवाल के वर्षों पुराने और बंद पड़े मकान का जर्जर छज्जा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। यह मकान पिछले करीब 10 वर्षों से बंद था और लंबे समय से खस्ताहाल स्थिति में था, इसके बावजूद समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।

हादसे में रतनलाल के सिर में गंभीर चोट आई। उन्हें तत्काल बहरोड़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं दोनों घायल बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रैफर किया गया। फिलहाल उनका इलाज जेके लोन हॉस्पिटल में जारी है। डॉक्टरों के अनुसार हिमांशी के चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं, जबकि हिमांशु के पैर में फ्रैक्चर हुआ है।

इस हादसे का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें साफ तौर पर दिख रहा है कि किस तरह अचानक छज्जा टूटकर चलती बाइक पर गिरता है और पलभर में एक खुशहाल परिवार मातम में बदल जाता है। फुटेज ने हादसे की भयावहता के साथ-साथ नगर परिषद और प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर किया है।

मामले में बहरोड़ नगर परिषद के आयुक्त नूर मोहम्मद ने बताया कि मकान से जुड़े एक ही परिवार के आठ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही नगर परिषद क्षेत्र में मौजूद जर्जर मकानों, दुकानों और भवनों का सर्वे कराने तथा उन्हें गिराने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। बहरोड़ थानाधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि मृतक के चाचा लालाराम निवासी कोलीला की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि वर्षों से खड़े जर्जर भवनों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती और कब तक आम लोग प्रशासनिक लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे।

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