सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में हुए कथित घोटालों की जांच नहीं होने पर हाईकोर्ट ने एसीबी के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। हाईकोर्ट ने एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग में कथित करोड़ों रुपये के घोटालों की जांच में ढिलाई पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा को 5 फरवरी को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एसीबी के अतिरिक्त एसपी और डीएसपी से पूछा कि डेढ़ साल में क्या कार्रवाई की गई है। इस पर अधिकारियों ने बताया कि मामले में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी ने न्यायालय को अवगत कराया कि एसआईटी गठन के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए SIT के प्रमुख डीआईजी आनंद शर्मा को 5 फरवरी को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये से जुड़े अन्य घोटालों पर भी कोई कदम नहीं उठाया गया है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजनेट परियोजना में जहां 17,500 डिवाइस लगाए जाने थे, वहां तीन वर्षों में केवल 1,750 डिवाइस ही लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए एसीबी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और आगामी सुनवाई में डीआईजी से स्पष्ट जवाब देने को कहा है।





